राजधानी दिल्ली के पूसा स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में पिछले तीन दिनों से भारत की विदेश नीति को लेकर एक बड़ी ‘मंथन बैठक’ चल रही थी. मौका था 11वें मिशन प्रमुख सम्मेलन (11th Heads of Missions Conference) का, जिसका समापन गुरुवार, 30 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के साथ हुआ.
इस सम्मेलन में दुनिया के कोने-कोने में तैनात भारत के राजदूत और उच्चायुक्त शामिल हुए, ताकि साल 2047 तक भारत को एक ‘विकसित राष्ट्र’ बनाने के सपने को कूटनीति के जरिए हकीकत में बदला जा सके.
बदलते भारत की नई कूटनीति
इस बार सम्मेलन का मुख्य विषय ‘Reforming Indian Diplomacy for 2047’ रखा गया था. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में साफ कर दिया कि अब भारत की कूटनीति सिर्फ कागजी समझौतों तक सीमित नहीं रहेगी. उन्होंने राजदूतों से कहा कि आज का भारत अपनी शर्तों पर और अपने आत्मविश्वास के साथ दुनिया से आंख मिलाकर बात करता है.
Attended the Heads of Missions Conference in New Delhi. We had extensive discussions on strengthening India’s global engagement through advancing trade, technology and strategic partnerships, while deepening the connect with our diaspora. pic.twitter.com/cUsFyJDWpF
— Narendra Modi (@narendramodi) April 30, 2026
पीएम मोदी ने खुद सोशल मीडिया पर इस बैठक के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि चर्चा का मुख्य केंद्र व्यापार, टेक्नोलॉजी और रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करना था. उन्होंने जोर दिया कि भारत की वैश्विक धाक तभी और बढ़ेगी जब हम तकनीक के मामले में आत्मनिर्भर होंगे और अपने आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे.
प्रवासी भारतीय: हमारी ‘ग्लोबल’ ताकत
पीएम मोदी ने राजदूतों को दुनिया भर में फैले प्रवासी भारतीयों के साथ जुड़ाव को और गहरा करने का विशेष टास्क भी दिया. प्रधानमंत्री का मानना है कि विदेशों में रह रहे भारतीय हमारे सबसे बड़े ‘ब्रांड एंबेसडर’ हैं. उनसे रिश्ते मजबूत करना न केवल कूटनीतिक रूप से जरूरी है, बल्कि ये भारत के सांस्कृतिक और आर्थिक हितों के लिए भी गेम-चेंजर साबित हो सकता है.
भविष्य की चुनौती
सम्मेलन को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी संबोधित किया. उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत की कूटनीति ने कितनी लंबी छलांग लगाई है. आज दुनिया के अलग-अलग देशों में भारत के 178 राजनयिक मिशन सक्रिय हैं, जो ये दिखाता है कि भारत अब वैश्विक मंच पर एक बड़ी शक्ति के रूप में स्थापित हो चुका है. इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी मौजूद रहे, जिन्होंने रणनीतिक सुरक्षा और कूटनीति के मेल पर अपने विचार रखे.
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-भारत एक्सप्रेस
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