Tradition of Scholarly Debate: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में देश को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने भारत की ज्ञान परंपरा को रेखांकित करते हुए नालंदा विश्वविद्यालय के गौरवशाली इतिहास और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा आधुनिक तकनीक अपनाने की क्रांतिकारी पहल का विशेष जिक्र किया.
‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में पीएम मोदी ने नालंदा विश्वविद्यालय द्वारा प्राचीन ‘शास्त्रार्थ’ परंपरा को पुनर्जीवित करने की सराहना की. साथ ही, उन्होंने केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में एआई (AI) और डेटा साइंस में बीटेक कोर्स शुरू होने को एक ऐतिहासिक कदम बताया, जो भारत के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़कर प्राचीन ग्रंथों के डिजिटल संरक्षण को नई गति देगा.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि,
नालंदा विश्वविद्यालय ने शास्त्रार्थ की हमारी प्राचीन परंपरा को फिर से जीवंत किया है. शास्त्रार्थ केवल अपनी बात रखने का माध्यम नहीं है. ये वाद-संवाद और मंथन की एक अनुशासित प्रक्रिया है. इसमें तर्क के साथ, तथ्य के साथ, अपनी बात कहना बहुत जरूरी होता है और उसमें आपकी महारत होनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि दूसरों के विचारों को धैर्य से सुनने और समझने की सीख भी इस शास्त्रार्थ की प्रक्रिया से मिलती है. मुझे खुशी है कि नालंदा विश्वविद्यालय ने इसे अपने दीक्षांत समारोह का हिस्सा बनाया.
नालंदा केवल एक नाम नहीं है, यह एक पहचान है, एक सम्मान
इससे पहले 19 जून 2024 को भी बिहार के राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा था कि नालंदा केवल एक नाम नहीं है, यह एक पहचान है, एक सम्मान है. नालंदा मूल है और मंत्र भी है. नालंदा इस सत्य का उद्घोष है कि ज्ञान नष्ट नहीं हो सकता, भले ही पुस्तकें आग में जल जाएं. उन्होंने इस बात पर बल दिया कि नवीन नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना भारत के स्वर्ण युग का शुभारंभ करेगी.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि नालंदा के प्राचीन अवशेषों के निकट इसका पुनरुद्धार विश्व को भारत की क्षमताओं से परिचित कराएगा. इससे विश्व को यह जानकारी मिलेगी कि प्रबल मानवीय मूल्यों वाले राष्ट्र, इतिहास का कायाकल्प करके एक बेहतर विश्व का निर्माण करने में सक्षम हैं.
उन्होंने कहा था नालंदा में विश्व, एशिया और कई देशों की विरासत समाहित है और इसका पुनरुद्धार सिर्फ भारतीय पहलुओं के पुनरुद्धार तक सीमित नहीं है.
वहीं, प्रधानमंत्री ने केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का जिक्र करते हुए कहा कि दिल्ली में स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा साइंस में बीटेक प्रोग्राम शुरू करने जा रही है. ये आधुनिक टेक्नोलॉजी को भारत के पारंपरिक ज्ञान से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे भारतीय भाषाओं के लिए नए अल टूल्स तैयार करने में मदद मिलेगी. हमारे प्राचीन ग्रंथों और पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में संरक्षित करने के काम को भी नई गति मिलेगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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