भारत का पूर्वोत्तर (North East) इलाका अपनी खूबसूरती और प्राकृतिक संपदा के लिए तो जाना ही जाता है, लेकिन अब ये क्षेत्र दुनिया भर में अपने खास खेती उत्पादों के लिए भी डंका बजाने को तैयार है. पीएम मोदी का पूरा फोकस अब पूर्वोत्तर राज्यों को ‘हाई वैल्यू’ यानी महंगे कृषि और बागवानी उत्पादों का एक बहुत बड़ा ग्लोबल हब बनाने पर है. इसी कड़ी में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री मणिक साहा की मौजूदगी में एक बेहद महत्वाकांक्षी ‘मिशन क्वीन पाइनएप्पल, त्रिपुरा’ योजना की शुरुआत की है. इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने 236 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट तय किया है.
जीआई टैग वाली ‘क्वीन’ को ब्रांड बनाने का मकसद
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस मिशन को लॉन्च करते हुए कहा कि पीएम मोदी का विजन है की त्रिपुरा और पूरे पूर्वोत्तर की कृषि क्षमता को अंतरराष्ट्रीय ब्रांड में बदलना है. उन्होंने समझाया कि इस मिशन का मकसद सिर्फ इतना नहीं है कि किसान खेत में अनानास उगाएं और उसे लोकल मार्केट में बेच दें.
बल्कि, असली प्लान ये है कि किसानों को फसल के उत्पादन से लेकर उसकी प्रोसेसिंग, हाई-टेक पैकेजिंग, ब्रांडिंग और सीधे विदेशों में एक्सपोर्ट करने तक की पूरी ‘वैल्यू चेन’ का एक एक्टिव पार्टनर बनाया जाए. जब किसान खुद इस पूरी प्रक्रिया से जुड़ेगा, तो बीच के बिचौलिए खत्म होंगे और मुनाफा सीधे उसकी जेब में जाएगा.
3 साल का मास्टरप्लान
बता दें कि त्रिपुरा की ‘क्वीन पाइनएप्पल’ अपनी लाजवाब खुशबू, कम रेशेदार बनावट और बेहतरीन स्वाद के लिए पूरी दुनिया में बेमिसाल है. इसे भारत सरकार की तरफ से ‘जीआई टैग’ भी मिल चुका है. लेकिन इतनी खूबियों के बावजूद, सही मार्केट लिंक न होने की वजह से आज भी यहां के किसानों को इसकी सामान्य कीमत ही मिल पाती है. इसी कमी को दूर करने के लिए ये मिशन लाया गया है.
ये पूरा प्रोजेक्ट तीन साल की एक कड़े टाइमलाइन के तहत लागू किया जाएगा. ये काम वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही से शुरू होकर वित्त वर्ष 2028 की चौथी तिमाही तक चलेगा. इस मिशन की कमान पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के हाथों में होगी. वहीं, इसे सफल बनाने के लिए केंद्र सरकार के सभी बड़े मंत्रालय और एजेंसियां जैसे कृषि मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय, MSME, और ट्राइफेड मिलकर काम कर रहे हैं.
खेत से लेकर एयरपोर्ट तक बनेगा हाई-टेक इन्फ्रास्ट्रक्चर
अनानास को खराब होने से बचाने और उसे ताजा-ताजा विदेशों तक भेजने के लिए जमीन पर एक शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है:
सेंट्रल हब और कलेक्शन सेंटर: अगरतला एयरपोर्ट के बिल्कुल पास एक विशाल सेंट्रल हब बनाया जाएगा. इसके अलावा पश्चिम त्रिपुरा, खोवाई और सिपाहीजला जिलों में 8 बड़े कलेक्शन सेंटर (संग्रह केंद्र) खुलेंगे.
स्मार्ट टेक्नोलॉजी: इन सेंटर्स पर फसलों की ग्रेडिंग होगी. साथ ही सोलर कोल्ड स्टोरेज, रीफर लॉजिस्टिक्स (ठंडी गाड़ियां), और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित फार्म मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी, जिससे अनानास की पल-पल की क्वालिटी पर नजर रखी जा सकेगी.
नलकाटा यूनिट का कायाकल्प: सालों से बंद पड़ी नलकाटा पाइनएप्पल प्रोसेसिंग यूनिट को प्राइवेट पार्टनर्स की मदद से दोबारा जिंदा किया जाएगा, जहां अनानास से जुड़े कई तरह के प्रोडक्ट्स तैयार होंगे.
कचरे से भी होगी मोटी कमाई
इस मिशन का सबसे दिलचस्प और सुंदर पहलू ये है कि ये ‘वेस्ट टू वेल्थ’ यानी कचरे से कंचन बनाने की सोच पर काम करेगा. दरअसल, अनानास के पौधे का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा फल तोड़ने के बाद बेकार मानकर फेंक दिया जाता है. लेकिन अब इस बचे हुए हिस्से को फेंका नहीं जाएगा.
सरकार इस वेस्ट से ‘ब्रोमेलिन’ (एक खास एंजाइम) निकालेगी और पाइनएप्पल लीफ फाइबर तैयार करेगी. इस रेशे से कपड़े और अन्य जीआई ब्रांडेड हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्ट्स बनाए जाएंगे. ये पूरा काम स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs), जनजातीय समुदायों और ग्रामीण युवाओं को सौंपा जाएगा, जिससे गांव-गांव में बंपर रोजगार के नए मौके पैदा होंगे.
-भारत एक्सप्रेस
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