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भारत और वेनेजुएला के बीच बढ़ती नजदीकी, क्या मोदी और रोड्रिगेज की बातचीत बदलेगी ग्लोबल तेल का गणित?

वेनेजुएला संकट के बीच पीएम मोदी और कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज की फोन बातचीत ने वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है. अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया है.

दुनिया के नक्शे पर इस वक्त वेनेजुएला सबसे बड़ी उथल-पुथल का केंद्र बना हुआ है. इसी बीच, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के बीच हुई फोन कॉल ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. प्रधानमंत्री मोदी ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस बात की जानकारी दी कि दोनों देशों के बीच रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए सहमति बन गई है.

लेकिन यह बातचीत सिर्फ दो नेताओं का हाल-चाल जानना भर नहीं थी. इसके पीछे छिपी है ग्लोबल पॉलिटिक्स, कच्चे तेल की लड़ाई और अमेरिका का वो सख्त रुख जिसने भारत जैसे देशों को सोचने पर मजबूर कर दिया है.

वेनेजुएला में क्या है मौजूदा हालात?

बता दें कि इस वक्त वेनेजुएला में स्थिति बहुत तनावपूर्ण है. 3 जनवरी 2026 को अमेरिकी सेना ने राजधानी काराकस में एक बड़ा सैन्य ऑपरेशन चलाकर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को बंधक बना लिया था. फिलहाल दोनों न्यूयॉर्क में हैं और कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं. इसी कारण अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्ते अब तक के सबसे खराब दौर में हैं.

एक तरफ अमेरिका ने वेनेजुएला पर शिकंजा कसा है, तो दूसरी तरफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नजर वहां के विशाल तेल भंडारों पर है. ट्रंप प्रशासन भारत के लिए दोहरी चुनौती खड़ी कर रहा है. फिलहाल भारत पर रूस से तेल खरीदने की वजह से 25% अतिरिक्त टैरिफ का बोझ है, साथ ही 25% रेसिप्रोकल टैरिफ भी लगा हुआ है.

अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस्टोफर राइट के बयानों से साफ है कि अब अमेरिका वेनेजुएला के तेल को खुद “मार्केट” करना चाहता है. यानी वेनेजुएला का तेल अब अमेरिकी शर्तों पर बिकेगा और उसका पैसा भी अमेरिका द्वारा नियंत्रित खातों में जाएगा. व्हाइट हाउस ने संकेत दिए हैं कि वे भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने की छूट दे सकते हैं, लेकिन इसके पीछे उनका असली मकसद भारत की रूसी तेल पर निर्भरता को कम करना है.

भारत के लिए ये डील कितनी जरूरी?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में आयात पर निर्भर है. अगर अमेरिका की नई व्यवस्था के तहत वेनेजुएला का तेल भारत को मिलता है, तो सालों से रुका हुआ द्विपक्षीय व्यापार फिर से शुरू हो सकता है. लेकिन पेच यहाँ फंसा है कि अमेरिका की शर्तें बहुत कड़ी होने वाली हैं.

भारत इस वक्त एक बहुत ही नाजुक मोड़ पर खड़ा है. एक तरफ हमें अपनी ऊर्जा सुरक्षा देखनी है, तो दूसरी तरफ अमेरिका के बढ़ते टैरिफ और रूस के साथ अपने पुराने रिश्तों का संतुलन बनाना है. प्रधानमंत्री मोदी और डेल्सी रोड्रिगेज की यह बातचीत दिखाती है कि भारत अब वैश्विक मंच पर सिर्फ एक दर्शक नहीं, बल्कि एक बड़ा रणनीतिक खिलाड़ी है जो दबाव में झुके बिना अपने रास्ते तलाशना जानता है.

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– भारत एक्सप्रेस



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