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Bharat Express Conclave: विकसित भारत 2047 का आधार है ‘सनातन जागृति’, प्रो. पवन सिन्हा बोले- सॉफ्ट पावर से विश्व गुरु बनेगा भारत

भारत एक्सप्रेस के मेगा कॉन्क्लेव में आध्यात्मिक गुरु प्रोफेसर पवन सिन्हा, जगतगुरु सतीश आचार्य और आचार्य पवन त्रिपाठी ने ‘विकसित भारत 2047’ और ‘सनातन संस्कृति’ पर अपने विचार साझा किए.

Acharya Pawan Tripathi, Satish Acharya, Pawan Sinha
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

Bharat Express 3rd Anniversary: भारत एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क के तीसरे स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित ‘मेगा कॉन्क्लेव 2026’ में देश की जानी-मानी हस्तियों ने शिरकत की. इस कार्यक्रम के एक विशेष सत्र में आध्यात्मिक गुरु प्रोफेसर पवन सिन्हा, जगतगुरु सतीश आचार्य और आचार्य पवन त्रिपाठी ने ‘विकसित भारत 2047’ और ‘सनातन संस्कृति’ के अंतर्संबंधों पर अपने विचार साझा किए.

प्रोफेसर पवन सिन्हा का सनातन संस्कृति पर नजरिया

भारत एक्सप्रेस मेगा कॉन्क्लेव के मंच पर आध्यात्मिक गुरु प्रोफेसर पवन सिन्हा ने विकसित भारत के विजन को सनातन संस्कृति से जोड़कर पेश किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की प्रगति का मूल आधार केवल अर्थव्यवस्था या रक्षा शक्ति नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना है.

सनातन संस्कृति ही भारत की असली ‘सॉफ्ट पावर’

प्रोफेसर पवन सिन्हा ने चर्चा के दौरान कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की जो भूमिका बढ़ रही है, उसका कारण ‘सनातन जागृति’ है. उन्होंने कहा कि जब हम अपनी संस्कृति को केंद्र में रखकर जल नीति, रक्षा नीति और शिक्षा नीति बनाते हैं, तो विश्व में भारत का मान बढ़ता है. यही सनातन संस्कृति हमारी वह ‘सॉफ्ट पावर’ है, जिसके दम पर भारत ग्लोबल मार्केट में एक ‘ग्लोबल लायन’ (विश्व शेर) की तरह उभर रहा है.

समग्र विकास के लिए एकजुटता जरूरी: पवन सिन्हा

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ‘2047 तक भारत को विश्व गुरु बनाने का स्वप्न केवल सरकार के प्रयासों से पूरा नहीं होगा. इसके लिए इंजीनियर, डॉक्टर, वकील, पत्रकार और धर्मगुरुओं समेत समाज के हर वर्ग को मिलकर काम करना होगा. जब देश का हर नागरिक अपनी संस्कृति के साथ विकसित होगा, तभी भारत वास्तविक रूप से महानतम शक्ति बनेगा.’ भारत एक्सप्रेस मेगा कॉन्क्लेव में हुई इस चर्चा ने यह स्पष्ट कर दिया कि आधुनिकता और तकनीक (AI) के युग में भी भारत की जड़ें अपनी प्राचीन संस्कृति में निहित हैं, जो इसे भविष्य की चुनौतियों से लड़ने की शक्ति देती हैं.

सिर्फ डिग्री नहीं, ‘स्किल’ और ‘रिसर्च’ से बनेगा विकसित भारत

जगतगुरु सतीश आचार्य ने कहा कि विकसित भारत का सपना विचारों और अनुसंधान (Research) से पूरा होगा. उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल बीए, एमए या बीटेक की डिग्री तक सीमित न रहें, बल्कि अपने कौशल को निखारें. उन्होंने सवाल उठाया कि हम मोबाइल और टीवी बनाना या अन्य तकनीकी जौहर सीखने की दिशा में मजबूती से क्यों नहीं बढ़ रहे? उनके अनुसार, ‘स्किल डेवलपमेंट’ ही वह चाबी है जो युवाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी.

रामकथा से संघर्ष और सामर्थ्य की सीख

सनातन की प्रासंगिकता पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को भगवान राम का जीवन इसलिए पढ़ना चाहिए क्योंकि वह संघर्ष की पराकाष्ठा है. एक राजा का पुत्र 14 वर्षों के वनवास के बाद पूरे विश्व का स्वामी बनकर लौटता है. उन्होंने माता कौशल्या के त्याग और राम के धैर्य का उदाहरण देते हुए कहा कि जब तक हमारे विचार और मानस मजबूत नहीं होंगे, तब तक हम ‘रील’ (Reels) से निकलकर ‘रियल’ (Real) दुनिया में प्रभाव नहीं छोड़ पाएंगे.

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