Rajasthan news: पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का असर भारत में भी दिख रहा है. राजस्थान के शिया समुदाय ने इस साल ईद न मनाने का फैसला किया है.
शोक में डूबी ईद
समुदाय के लोग शोक के प्रतीक के तौर पर अपनी बांह पर काली पट्टी बांधकर नमाज अदा करेंगे. जयपुर की शिया जामा मस्जिद के इमाम सैयद नाजिश अकबर काजमी ने कहा कि इस बार ईद पर कोई खुशी नहीं होगी. न नए कपड़े पहने जाएंगे, न मिठाइयां और पकवान बनेंगे.
इमाम का बयान
काजमी ने कहा कि खामेनेई समुदाय के सबसे सम्मानित धार्मिक नेता थे. उनकी हत्या ने शिया मुसलमानों को गहरे दुख में डाल दिया है. उन्होंने अमेरिका और इज़राइल को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और कहा कि नमाज के दौरान ईरान के दुश्मनों के विनाश की दुआ की जाएगी.
आलोचना पर जवाब
ईरान के समर्थन को लेकर उठ रही आलोचनाओं पर काजमी ने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि जो ईरान के पक्ष में हैं, उन्हें वहीं चले जाना चाहिए. लेकिन यह सोच गलत है. उन्होंने सवाल उठाया कि भारत में इजराइल का समर्थन करने वाले लोग क्या बता सकते हैं कि इजराइल ने भारत के लिए अब तक क्या किया है? वहीं ईरान हमेशा भारत के साथ खड़ा रहा है.
मुतवल्ली का बयान
शिया जामा मस्जिद के मुतवल्ली सैयद कासिम तकवी ने कहा कि उनके सर्वोच्च धार्मिक नेता और मासूम बच्चों की हत्या अमेरिका और इज़राइल की वजह से हुई है. इसी कारण समुदाय के लोग विरोध जताने के लिए पुराने कपड़े पहनकर और काली पट्टी बांधकर नमाज अदा करेंगे.
महिलाओं की राय
समुदाय की महिलाओं ने भी इस फैसले का समर्थन किया. बुज़ुर्ग ने कहा कि जब पूरा समाज गहरे दुख में है तो ईद मनाना संभव नहीं. बच्चे, बड़े और बुज़ुर्ग सभी बिना नए कपड़ों के नमाज पढ़ेंगे और घरों में कोई पकवान नहीं बनेगा.
वैश्विक प्रभाव का ज़िक्र
रेशमा तकवी ने कहा कि खामेनेई ने हमेशा इंसानियत का संदेश दिया और ज़ुल्म के खिलाफ आवाज उठाई. उनकी हत्या से शिया मुसलमानों में गहरा शोक है. उन्होंने कहा कि इस बार ईद पर केवल सादगी होगी और नमाज़ के दौरान खामेनेई को याद किया जाएगा.
भारतीय पहचान और आस्था
रेशमा ने आगे कहा कि हम भारतीय हैं और हमें अपने देश पर गर्व है, लेकिन इंसानियत का पैगाम देने वालों के साथ खड़ा होना भी जरूरी है. खामेनेई को उन्होंने इमाम हुसैन का प्रतिनिधि बताया, जिन्होंने हमेशा कहा था कि मजलूमों का साथ दो.
संघर्ष की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि अमेरिका और इजराइल के हमलों में ईरान के 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए. पश्चिम एशिया में यह संघर्ष 28 फरवरी से शुरू हुआ था और अब तीसरे हफ्ते में पहुंच चुका है.
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राजनीतिक प्रतिक्रिया
भारत में इस फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है. विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता ने कहा कि खामेनेई का भारत से कोई सीधा संबंध नहीं है, ऐसे में उनके लिए मातम मनाना और त्योहार न मनाना गंभीर चिंता का विषय है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा हो सकता है और कुछ लोग मुसलमानों को गुमराह कर रहे हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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