What Is Force Feeding?: जंतर मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक का बिना खाए-पीए आज 19वां दिन है. इसके चलते वांगचुक का वजन अब तक करीब 8.5 किलोग्राम कम हो चुका है. वहीं, अदालत में सोनम वांगचुक के जीवन की रक्षा के लिए याचिका दायर की गई है. याचिका में कहा गया कि कोर्ट अधिकारियों को सोनम वांगचुक का इलाज करने का निर्देश दे. वहीं याचिका में ये भी कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर उन्हें ‘फोर्स फीड’ कराया जाए. ऐसे में आइए जानते हैं कि फोर्स फीडिंग क्या होता है और इसको लेकर कानूनी प्रक्रिया क्या है?
क्या है फोर्स फीडिंग और कैसे की जाती है?
फोर्स फीडिंग एक ऐसी चिकित्सीय (मेडिकल) प्रक्रिया है, जिसके तहत किसी ऐसे व्यक्ति को जबरन भोजन या पोषण दिया जाता है, जो खुद खाना खाने से पूरी तरह इनकार कर रहा हो. आम तौर पर ऐसा तब किया जाता है जब अनशनकारी या मरीज की जान को गंभीर खतरा हो.
कैसे की जाती है फोर्स फीडिंग?
पहला ट्यूब के जरिए, जिसमें नाक या मुंह के रास्ते पेट तक एक पतली प्लास्टिक की नली डाली जाती है. इसी के जरिए मरीज को ग्लूकोज, विटामिन, प्रोटीन, कार्ब्स, कार्बोहाइड्रेट्स और कई सारे मिनरल दिए जाते है, जिससे मरीज की न्यूट्रिशनल कमी और डिहाइड्रेशन को हैंडल किया जा सके.
जबरन खिलाने पर क्या कहता है कानून?
अब ऐसे में ये जानना भी बेहद जरूरी है कि क्या किसी को जबरन खिलाना सही है और इसको लेकर भारत का कानून क्या कहता है?
फोर्स फीडिंग को लेकर कोई अलग या विशेष कानून नहीं है, लेकिन राज्य का ये संवैधानिक कर्तव्य है कि वो हर नागरिक के जीवन और उसके स्वास्थ्य की रक्षा करे. इसी को देखते हुए कोर्ट के निर्देश के बाद मरिज को या किसी भी ऐसे व्यक्ति को फोर्स फीड कराया जा सकता है.
बता दें कि पहले भूख हड़ताल को आत्महत्या के प्रयास के रूप में देखा जाता था.
कब से भूख हड़ताल पर है वागंचुक?
बता दें कि सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे है. वांगचुक NEET पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के 25 दिनों से अधिक पुराने आंदोलन में शामिल हुए थे.
-भारत एक्सप्रेस
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