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सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट में एडहॉक जजों की नियुक्ति संबंधी फैसले में किया संशोधन

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट में लंबित मामलों के निपटारे के लिए एडहॉक जजों की नियुक्ति प्रक्रिया में संशोधन किया

Supreme Court

देश की विभिन्न हाईकोर्ट में लंबित केसों का निपटारा करने के लिए रिटायर्ड जजों को एडहॉक जजों के रूप में नियुक्ति को लेकर दिए गए अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने संशोधन कर दिया है. सीजेआई संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने यह फैसला दिया है.

हाईकोर्ट में जजों की कमी मुकदमों में लंबित

अदालत ने लोक प्रहरी के महासचिव व पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी एस एन शुक्ला की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है. देश भर के हाईकोर्टमें लंबित मामलों, विशेष रूप से आपराधिक अपीलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए एडहॉक जजों की नियुक्ति को आसान बनाने के लिए यह निर्देश पारित किया है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि प्रत्येक हाई कोर्ट एडहॉक जजों की नियुक्ति 2-5 की संख्या में रखेगा, लेकिन स्वीकृत संख्या के 10 फीसदी से अधिक नही होना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि एडहॉक जज हाई कोर्ट के एक मौजूदा जज की अध्यक्षता वाली पीठ में बैठेंगे. वो पीठ की अध्यक्षता नही करेंगे.

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि देश भर के हाईकोर्ट में लंबित मुकदमों का मुख्य कारण जजों की कमी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हाई कोट्स में जरूरत पड़ने पर अस्थायी जज नियुक्त किये जा सकते है. इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 224A का इस्तेमाल करना पड़ेगा. हर जज पर बहुत ज्यादा केस है. इसलिए 2021 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में बदलाव जरूरी है. अप्रैल 2021 में दिए गए फैसले में कोर्ट ने हाईकोर्ट में एडहॉक जजों की नियुक्ति को लेकर फैसला दिया था.

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि नियमित न्यायधीशों की नियुक्ति के बजाए, तदर्थ आधार पर न्यायधीशों की नियुक्ति करने के खिलाफ भी चेतावनी दी थी. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि तदर्थ न्यायधीशों को नियमित न्यायधीशों की नियुक्ति के लिए कुछ शर्तें निर्धारित किया था. इनमें से एक शर्त यह था कि तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति तभी की जा सकती है जब संबंधित हाई कोर्ट में जजों की रिक्तियां स्वीकृत पद से 20 फीसदी या इससे अधिक हो.

-भारत एक्सप्रेस



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