देश के प्रसिद्ध मंदिरों में देवी देवताओं के VIP दर्शन की व्यवस्था खत्म करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. याचिका में कहा गया है था कि विशेष या जल्द दर्शन के लिए अतिरिक्त वीआईपी दर्शन शुल्क वसूलना मूल अधिकारों का उल्लंघन है. सीजेआई संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता कि इस दलील से कोर्ट सहमत है कि मंदिरों में वीआईपी को तरजीह नहीं दी जानी चाहिए.
लेकिन आर्टिकल 32 के तहत यह याचिका सुनवाई योग्य नही है. अगर सम्बंधित ऑथोरिटी कोई कार्रवाई करना चाहती है तो उस पर कोई रोक नहीं है. याचिका में कहा गया है कि मंदिरों में दर्शन का यह चलन संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 में निहित समानता के सिद्धांतों का उल्लंघन है, क्योंकि इससे शुल्क वहन करने में असमर्थ श्रद्धालुओं के साथ भेदभाव होता है. याचिका में मंदिर में दर्शन के लिए शीघ्र पहुच को लेकर अतिरिक्त शुल्क को लेकर कई चिंताएं व्यक्त की गई थी.
याचिका में कहा गया था कि 400-500 रुपये तक का अतिरिक्त शुल्क लेकर मंदिरों में देवताओं के विग्रह के अधिकतम निकटता तक जल्दी पहुचा जा सकता है. ये व्यवस्था उन साधारण भक्तों के प्रति असंवेदनशील है. जो शारीरिक और आर्थिक बाधाओं का सामना करते है. याचिका में (1)समानता और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करने के रूप में वीआईपी दर्शन शुल्क को समाप्त करने की घोषणा, (2) सभी भक्तों के साथ समान व्यवहार करने का निर्देश, (3) मंदिर में समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करना और (4) याचिका में देश भर के मंदिरों के प्रबंधन और प्रशासन की देखरेख के लिए एक राष्ट्रीय बोर्ड का गठन करने की मांग की गई थी.
-भारत एक्सप्रेस
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