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सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को आजीवन चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने की याचिका पर केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को आजीवन चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित करने की याचिका पर केंद्र और चुनाव आयोग से तीन सप्ताह में जवाब मांगा. कोर्ट ने जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 8 और 9 पर विचार करने की बात कही.

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Aarika Singh Edited by Aarika Singh

आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को आजीवन चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दे दिया है. कोर्ट चार मार्च को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान तीन जजों की बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि एक सरकारी कर्मचारी रेप या हत्या के मामले में दोषी करार दिया जाता है तो उसकी नौकरी चली जाती है और उसे वापस नही मिलती है, लेकिन एमपी/एमएलए को दोषी करार दिया जाता है तो चुनाव लड़ने पर 6 साल के लिए प्रतिबंध लगाया जाता है.

उसके बाद दोबारा चुनाव लड़ कर सांसद या विधायक बन सकता है, मंत्री बन सकता है. इसलिए जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 8 और 9 को जांच करना पड़ेगा. यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील और बीजेपी नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर की गई है. जिस याचिका पर पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया ने सलाह दिया था कि सजायाफ्ता नेताओं को जीवन भर चुनाव नहीं लड़ने देना चाहिए.

पार्टी पदाधिकारी नहीं कर सकती नियुक्त

याचिका में कहा गया है कि आरपीए की धारा 8 के तहत 2 साल या उससे अधिक की सजा पाने वाले नेता को गलत रियायत दी गई है. ऐसा सजायाफ्ता नेता अपनी सजा पूरी करने के 6 साल बाद चुनाव लड़ने के योग्य हो जाता है. इस धारा को असंवैधानिक करार दिया जाना चाहिए. एमिकस क्यूरी विजय हंसारिया ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि देश के दूसरे राज्यों में बार-बार सुनवाई टाल दी जाती है और सुनवाई टालने के कारण भी नहीं बताया जाता. इसपर कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि बहुत से ऐसे राज्य है जहां अबतक एमपी/एमएलए कोर्ट गठित नही की गई है.

विजय हंसारिया ने कोर्ट को सुझाव दिया है कि क्या चुनाव आयोग ऐसा नियम नहीं बना सकता कि राजनीतिक पार्टियों गंभीर अपराध में सजा पाए लोगों को पार्टी पदाधिकारी नहीं नियुक्त कर सकती. एमिकस क्यूरी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दोषी ठहराए जाने के लिए सांसद या विधायक के चुनाव लड़ने पर छह साल की रोक लगती है. छह साल बाद वो फिर से चुनाव लड़ सकता ब. लिहाजा ये संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है.

-भारत एक्सप्रेस



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