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बदहाल सरगुजा! मासूम की मौत का जिम्मेदार कौन? 2 घंटे तड़पती रही बच्ची, डॉक्टर नदारद और एंबुलेंस

Surguja Healthcare Negligence: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में कुन्नी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर और इलाज न मिलने से विशेष संरक्षित जनजाति की 6 महीने की बच्ची की मौत हो गई.

दिनेश गुप्ता, अम्बिकापुर

Surguja Healthcare Negligence: स्वास्थ्य सुधार को लेकर सरकार और व्यवस्था की खूब तारीफें की जाती हैं लेकिन जब हकीकत सामने आती है तो तस्वीर बिल्कुल अलग होती है. हालात इतने भयावह होते हैं कि सुनकर ही रूह कांप जाए. ऐसी ही एक घटना छत्तीसगढ़ के सरगुजा में सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी और बड़े-बड़े दावे करने वालों को कटघरे में खड़ा कर दिया. यहां इलाज न मिलने के कारण विशेष संरक्षित जनजाति की 6 महीने की बच्ची की मौत हो गई. कुन्नी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में समय पर डॉक्टर और इलाज उपलब्ध न होने से मासूम ने दम तोड़ दिया. परिवार गहरे सदमे में है और इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

अस्पताल की बदहाली उजागर

यह घटना लुण्ड्रा विधानसभा क्षेत्र के लखनपुर ब्लॉक स्थित कुन्नी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की है. 27 दिसंबर 2025 को सुबह 10 बजे ग्राम लब्जी कुर्मेनपारा के संत राम मझवार अपनी बेटी अमीषा को लेकर अस्पताल पहुंचे. बच्ची दो दिनों से बीमार थी और दूध नहीं पी रही थी लेकिन ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर देव कुमार साहू मौजूद नहीं थे.

परिजनों का क्या कहना है?

परिजनों का कहना है कि उन्होंने करीब 2 घंटे तक इंतजार किया लेकिन डॉक्टर नहीं आए. इलाज न मिलने और एंबुलेंस की सुविधा न होने के कारण उन्हें बच्ची को निजी क्लीनिक ले जाना पड़ा. वहां डॉक्टर ने अंबिकापुर रेफर कर दिया. बाद में कुन्नी CHC की एंबुलेंस से अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज पहुंचे लेकिन वहां बच्ची को मृत घोषित कर दिया गया.

लापरवाही पर सवाल

परिजनों का आरोप है कि सही समय पर डॉक्टर होते तो बच्ची बच सकती थी. नर्सों ने ही इलाज किया और एंबुलेंस भी देर से मिली. उनका कहना है कि अस्पताल प्रबंधन लापरवाही छुपाने में लगा है. क्षेत्र में डॉक्टर और स्टाफ की भारी कमी है, जिससे ग्रामीणों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता. आरएमए के भरोसे चल रहा यह केंद्र लोगों के लिए भगवान भरोसे बन गया है.

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प्रशासन का क्या कहना है?

इस मामले में सरगुजा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पी. एस. मार्को ने कहा है कि जानकारी लेकर कार्रवाई की जाएगी लेकिन बड़ा सवाल यह है कि ऐसी घटनाएं कब तक होती रहेंगी और विशेष संरक्षित जनजातियों के लिए बनी योजनाएं धरातल पर कब उतरेंगी. ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली कब सुधरेगी, यह अब भी अनुत्तरित है.

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-भारत एक्सप्रेस



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