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‘भारत’ ग्लोबल साउथ को स्वच्छ और सस्टेनेबल भविष्य की ओर ले जाने में निभा रहा महत्वपूर्ण भूमिका : प्रल्हाद जोशी

ग्लोबल क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन में सोलर एनर्जी के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री (Pralhad Joshi) ने कहा कि इंटरनेशनल सोलर अलायंस (आईएसए) के नेतृत्व में सोलर एनर्जी 120 से अधिक देशों में एक परिवर्तनकारी शक्ति बन गई है.

Pralhad Joshi

सोलर एनर्जी.

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी (Pralhad Joshi) ने मंगलवार को कहा कि भारत ग्लोबल साउथ को पहले से अधिक स्वच्छ और सस्टेनेबल भविष्य की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

Pralhad Joshi सोलर एनर्जी के प्रभाव पर डाला प्रकाश

ग्लोबल क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन में सोलर एनर्जी के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री (Pralhad Joshi) ने कहा कि इंटरनेशनल सोलर अलायंस (आईएसए) के नेतृत्व में सोलर एनर्जी 120 से अधिक देशों में एक परिवर्तनकारी शक्ति बन गई है.

केंद्रीय मंत्री ने एक्स पर किया पोस्ट

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में केंद्रीय मंत्री जोशी ने लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत एक कैटेलिस्ट के रूप में उभरा है, जिसने ग्लोबल साउथ को क्लीन, उज्जवल और अधिक सस्टेनेबल भविष्य की रूपरेखा तैयार करने में सशक्त बनाया है.” उन्होंने कहा, “सोलर एनर्जी ग्लोबल एनर्जी ट्रांजिशन में एक परिवर्तनकारी शक्ति बन गई है.”

Pralhad Joshi का यह पोस्ट उनके द्वारा लिखे एक न्यूजपेपर आर्टिकल के संदर्भ में था. ‘द इंटरनेशनल सोलर अलायंस हैज शोन अ पाथ टू क्लीन एनर्जी’ शीर्षक के इस आर्टिकल को शेयर करते हुए केंद्रीय मंत्री ने ग्लोबल एनर्जी ट्रांजिशन में सोलर पावर के महत्व पर प्रकाश डाला.

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केंद्रीय मंत्री जोशी (Pralhad Joshi) के इस पोस्ट को ‘पीएमओ इंडिया’ ने रिपोस्ट करते हुए एक्स हैंडल पर लिखा, “केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने एक लेख के जरिए बताया कि ग्लोबल एनर्जी लैंडस्कैप को सोलर एनर्जी किस प्रकार एक नया रूप दे रही है. न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में इंटरनेशनल सोलर अलायंस क्लीन एनर्जी क्रांति लाने में अहम भूमिका निभा रही है.”

इस बीच, एचएसबीसी की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में रिन्यूएबल एनर्जी उत्पादन की हिस्सेदारी मई में 17 प्रतिशत और जून के पहले 10 दिनों में 19 प्रतिशत हो गई, जबकि पिछले वर्ष मई/जून में यह क्रमशः 13 प्रतिशत/14 प्रतिशत थी.

रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़े बेस और अत्यधिक वर्षा के कारण बिजली की मांग में गिरावट आई है. मई में बिजली की मांग/पीक मांग में क्रमशः 4 प्रतिशत/7 प्रतिशत की गिरावट आई और जून के पहले 10 दिनों में 1 प्रतिशत/1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.

-भारत एक्सप्रेस



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