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दिल्ली के उत्तमनगर में ईद पर ‘खून की होली’ की धमकी से मचा हड़कंप, गृह मंत्री अमित शाह की चौखट पर पहुंचा मामला; हाई कोर्ट में याचिका दर्ज

दिल्ली के उत्तम नगर में युवक की हत्या के बाद ‘खून की होली’ धमकियों से माहौल तनावपूर्ण हो गया है. मामला अमित शाह तक पहुंचा, जबकि दिल्ली हाई कोर्ट में ईद से पहले सुरक्षा को लेकर याचिका दायर हुई है..

दिल्ली का उत्तम नगर इलाका इन दिनों डर और तनाव की गिरफ्त में है. 4 मार्च को होली के दिन 26 वर्षीय हिंदू युवक तरुण भुटोलिया की हत्या के बाद शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े सांप्रदायिक टकराव का रूप लेता जा रहा है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद ने सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इलाके में ‘मुस्लिम समुदाय’ को मिल रही खुली धमकियों और ‘खून की होली’ खेलने के संदेशों पर चिंता जताई है.

वहीं यह मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट की दहलीज पर भी पहुंच गया है, जहाँ आगामी ईद के त्यौहार पर बड़े पैमाने पर हिंसा होने की आशंका जताते हुए तत्काल सुरक्षा की गुहार लगाई गई है.

अमित शाह से हस्तक्षेप की मांग

सांसद मोहम्मद जावेद ने गृह मंत्री अमित शाह को लिखे पत्र में कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि उत्तम नगर में एक विशेष समुदाय के खिलाफ सुनियोजित तरीके से डर का माहौल बनाया जा रहा है. उन्होंने शाह से मांग की है कि दिल्ली पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं ताकि नफरत फैलाने वालों और ‘खून की होली’ जैसे भड़काऊ नारे लगाने वालों पर सख्ती से नकेल कसी जा सके.

कांग्रेस सांसद ने अनुच्छेद 14, 19 और 23 का हवाला देते हुए कहा कि भारत का संविधान किसी भी नागरिक को ‘डर’ के साये में जीने की अनुमति नहीं देता और इस वक्त उत्तम नगर के निवासियों का राज्य की सुरक्षा क्षमता से भरोसा उठ रहा है. उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका की एक स्वतंत्र जांच कराई जाए.

क्या ईद पर हिंसा का है डर?

इलाके में बढ़ते तनाव के बीच ‘नागरिक अधिकारों के संरक्षण के लिए गठित संगठन’ (APCR) ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है. मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय की पीठ के समक्ष वरिष्ठ वकील नित्या रामकृष्णन ने दलील दी कि सोशल मीडिया पर खुलेआम ऐसे संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं जिनमें ईद पर हिंसा करने की धमकियां दी जा रही हैं.

वकील ने कोर्ट को बताया कि पुलिस को सूचित करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे स्थानीय निवासियों में भारी खौफ है. हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे तत्काल सूचीबद्ध करने पर सहमति दे दी है, जिससे अब पुलिस और प्रशासन पर सुरक्षा बढ़ाने का भारी दबाव है.

VHP ने पलटवार करते हुए क्या कहा?

दूसरी ओर इस मामले पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी कड़ा रुख अपना लिया है. वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब तरुण जैसे हिंदुओं की सरेआम हत्या की जाती है, तब ये ‘सेक्युलर’ नेता खामोश रहते हैं.

उन्होंने आरोप लगाया कि अब ईद की आड़ में हिंदुओं को बदनाम करने और ‘जिहादियों’ को भड़काने का एक नया इको-सिस्टम सक्रिय हो गया है. बंसल ने कहा कि हिंदू कभी पहला वार नहीं करता, लेकिन दिल्ली में पिछले एक दशक में दर्जनों हिंदुओं की हत्या के बावजूद कुछ नेता केवल तुष्टिकरण की राजनीति के तहत पत्र लिख रहे हैं और दुष्प्रचार कर रहे हैं.

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क्या थी विवाद की जड़?

यह पूरा विवाद एक मामूली बात से शुरू हुआ था. होली के दिन तरुण भुटोलिया के परिवार की एक बच्ची द्वारा फेंका गया पानी का गुब्बारा गलती से एक मुस्लिम महिला पर गिर गया था. आरोप है कि इसी रंजिश में उसी शाम महिला के परिवार के सदस्यों ने तरुण को घेरकर उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी. चूंकि आरोपी परिवार मुस्लिम समुदाय से है, इसलिए इस आपराधिक घटना ने देखते ही देखते सांप्रदायिक रंग ले लिया.

इसके बाद आरोपियों के घर पर एमसीडी का बुलडोजर भी चला, जिसे बाद में कोर्ट ने फिलहाल रोकने का निर्देश दिया है. अब देखना यह होगा कि गृह मंत्रालय और हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली पुलिस आने वाले त्यौहारों पर शांति व्यवस्था कैसे कायम रखती है.

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-भारत एक्सप्रेस



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