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गढ़चिरौली में ‘सफेद झंडा’! अमित शाह के खौफ से कांप रहे नक्सली; 60 साथियों के साथ वेणुगोपाल राव का सरेंडर

Venugopal Rao Surrender: गृहमंत्री अमित शाह के नक्सल मुक्त भारत मिशन का बड़ी कामयाबी मिली है. गढ़चिरौली में नक्सली मल्लौजुला वेणुगोपाल राव ने अपने 60 साथियों के साथ सरेंडर कर दिया है.

Amit Shah Gadchiroli Maoists Mallojula Venugopal Rao Surrender

माओवादी संगठन में 'आर-पार की जंग'

Venugopal Rao Surrender: एक समय था जब वामपंथी उग्रवाद यानी नक्सलवाद भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जाता था. साल 2010 में 200 से अधिक जिलों में इसकी दहशत फैली थी. गृहमंत्री अमित शाह के नक्सलमुक्त भारत मिशन के बाद यह काफी कमजोर हुआ है. आज, भारत का सुरक्षा ग्रिड इस खतरे को जड़ से खत्म करने के करीब पहुंच चुका है. इसी कड़ी में मंगलवार को एक माओवादी संगठन की कमर तोड़ टूट गई. CPI (माओवादी) के पॉलित ब्यूरो सदस्य और तेलंगाना के मूल निवासी मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ ‘सोनू’ ने महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में 60 कैडरों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया. इसे गृहमंत्री अमित शाह के नक्सलमुक्त भारत के संकल्प को मिली बड़ी कामयाबी की तरह देखा जा रहा है.

देश में नक्सली लगातार कम हो रहे हैं. गृह मंत्रालय के ताजा आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं. 2010 के मुकाबले हिंसा में 81% और मौतों में 85% की कमी आई है. यह अभूतपूर्व सफलता सख्त सुरक्षा अभियानों और प्रभावित क्षेत्रों में लक्षित विकास प्रयासों के संयोजन का परिणाम है.

‘माओवादियों का रास्ता पूरी तरह से गलत था’

सोनू का यह कदम उनके द्वारा जारी किए गए उस पत्र के बाद आया है, जिसमें उन्होंने खुले तौर पर स्वीकार किया था कि ‘माओवादियों का रास्ता पूरी तरह से गलत था’ और उन्होंने अपने साथियों से ‘अर्थहीन बलिदान’ न देने की अपील की थी. यह आत्मसमर्पण, गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में 2026 तक नक्सलवाद को खत्म करने के लिए चलाए जा रहे लगातार और सफल ऑपरेशनों का सीधा नतीजा माना जा रहा है.

60 कैडरों का आत्मसमर्पण

मल्लोजुला वेणुगोपाल राव और 60 कैडरों का यह आत्मसमर्पण माओवादी संगठन के लिए सिर्फ एक झटका नहीं, बल्कि विनाश का संकेत है. खुद संगठन के एक वरिष्ठ नेता द्वारा ‘रास्ते को गलत’ बताना और ‘नेतृत्व की गलतियों’ को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करना, यह दिखाता है कि माओवादियों के अंदर का ढांचा पूरी तरह से चरमरा चुका है.

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राव के आत्मसमर्पण को तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के कुछ माओवादी गुटों का समर्थन मिलना संकेत देता है कि अब अधिक से अधिक कैडर अर्थहीन संघर्ष को छोड़कर देश की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं. यह घटना भारत के आंतरिक सुरक्षा लक्ष्य 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है. यह साबित करता है कि गृहमंत्री अमित शाह के नक्सल मुक्त भारत अभियान ने देश की आंतरिक सुरक्षा को बेहतर किया है.



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