कांग्रेस पार्टी राज्यसभा चुनावों पर पूरा फोकस कर रही है. पार्टी ने अपनी तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं और अधिक से अधिक सीटें जीतने की रणनीति पर काम कर रही है. सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस इस बार 6 राज्यसभा सीटों पर आराम से जीत दर्ज करने की उम्मीद कर रही है. इनमें सबसे ज्यादा जोर कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश और झारखंड जैसी राज्यों पर है, जहां पार्टी के आंतरिक समीकरण और गठबंधन की रणनीति साथ-साथ चल रही है.
कर्नाटक: 3 सीटों का बड़ा खेल, खरगे-सिद्धा की दावेदारी
कर्नाटक कांग्रेस के लिए सबसे महत्वपूर्ण राज्य साबित हो रहा है. यहां पार्टी 3 सीटें जीत सकती है. रणनीति के तहत 2 टिकट कर्नाटक के स्थानीय नेताओं को और 1 बाहरी उम्मीदवार को दिया जाएगा. पार्टी शीर्ष नेतृत्व मल्लिकार्जुन खरगे, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और शर्मिला रेड्डी को टिकट देने पर विचार कर रहा है. अगर सिद्धारमैया राज्यसभा जाने से इनकार करते हैं तो सौम्या रेड्डी और अंजली निम्बालकर के नाम मजबूत विकल्प के रूप में सामने आ सकते हैं. दिलचस्प यह है कि अगर आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस प्रमुख जगन मोहन रेड्डी से गठबंधन की बात आगे बढ़ती है, तो पवन खेड़ा को कर्नाटक से टिकट दिए जाने की संभावना है.
झारखंड में क्रॉस वोटिंग का खतरा देखते हुए पार्टी पवन खेड़ा को सुरक्षित सीट देना चाहती है.
- राजस्थान: गहलोत बनाम अन्य, दलित कार्ड और पवन खेड़ा की दावेदारी
राजस्थान में कांग्रेस दो सीटों पर नजर जमा रही है. यहां दो बड़े नामों पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और भंवर जितेंद्र सिंह की चर्चा जोरों पर है. हालांकि, सिटिंग दलित सांसद नीरज दांगी अभी रेस में सबसे आगे बताए जा रहे हैं. पवन खेड़ा राजस्थान से भी अपनी दावेदारी जता रहे हैं. उनके समर्थकों का तर्क है कि हरियाणा में हाल ही में दलित उम्मीदवार को राज्यसभा भेजा गया है, इसलिए राजस्थान में भी संतुलन बनाए रखना चाहिए.
मध्य प्रदेश: क्रॉस वोटिंग का खतरा, दिग्विजय-कमलनाथ विकल्प
मध्य प्रदेश में कांग्रेस एक सीट जीतने की स्थिति में है. पिछली बार यहां से अशोक यादव को राज्यसभा भेजा गया था. इस बार अरुण यादव और मीनाक्षी नटराजन के बीच टक्कर है, जिसमें मीनाक्षी नटराजन को थोड़ी बढ़त बताई जा रही है. लेकिन आलाकमान को मीनाक्षी के उम्मीदवार बनने पर क्रॉस वोटिंग का खतरा दिख रहा है. ऐसे में भरोसेमंद विकल्प के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के नाम फिर से मजबूती से उभरकर सामने आए हैं. मध्य प्रदेश में कांग्रेस अपनी एक सीट बचाने के लिए कोई जोखिम नहीं लेना चाहती
- झारखंड: पवन खेड़ा का प्लान-बी झारखंड में कांग्रेस को एक सीट मिलने की संभावना है. क्रॉस वोटिंग के खतरे को देखते हुए पार्टी यहां पवन खेड़ा को टिकट देने के मूड में है. कर्नाटक या राजस्थान में अगर सीट नहीं मिली तो झारखंड उनका बैकअप प्लान बन सकता है.
खरगे, सिद्धारमैया-डीके गुट, गहलोत खेमा, दिग्विजय-कमलनाथ जैसे बड़े नामों के बीच टिकट बंटवारे की जटिल कवायद चल रही है. पवन खेड़ा जैसे युवा चेहरों को जगह देने की कोशिश भी पार्टी की नई पीढ़ी को आगे लाने का संकेत है. हालांकि, गुटबाजी और क्रॉस वोटिंग का खतरा कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है. अगर पार्टी इन पेंचों को सुलझाने में सफल रही तो 6 सीटों का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल नहीं होगा. राज्यसभा चुनाव कांग्रेस के लिए संख्या बढ़ाने का मौका है.
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-भारत एक्सप्रेस
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