आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों से आठ सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. अदालत ने साफ कहा कि इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि आदेश तीन भागों में विभाजित है और एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट को कोर्ट के आदेश का अभिन्न हिस्सा माना जाएगा.
राष्ट्रीय राजमार्गों और सड़कों से आवारा पशु हटाने के निर्देश
जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि आदेश का दूसरा हिस्सा राजस्थान हाई कोर्ट के निर्देशों से संबंधित है. उन्होंने यह भी दोहराया कि सभी राज्यों के नोडल अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि राष्ट्रीय राजमार्गों, सड़कों और एक्सप्रेसवे से आवारा पशुओं को हटाया जाए. इसके लिए एक संयुक्त समन्वित अभियान चलाया जाएगा, ताकि सड़कों पर किसी भी तरह की दुर्घटना या परेशानी से बचा जा सके. कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन मवेशियों और पशुओं को हटाया जाएगा, उन्हें सभी आवश्यक देखभाल और सुविधा दी जाए.
नसबंदी के बाद कुत्तों को शेल्टर होम में रखा जाए
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि आवारा कुत्तों की नसबंदी के बाद उन्हें उसी जगह पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि उन्हें शेल्टर होम में रखा जाएगा. कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया कि आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए और इस काम की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएं.
इससे पहले सभी राज्यों के मुख्य सचिवों ने सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी थी कि आवारा कुत्तों के काटने की घटनाओं को रोकने के लिए उन्होंने पर्याप्त कदम नहीं उठाए. अदालत ने यह भी कहा था कि कुत्ते के काटने के पीड़ितों की आवाज भी सुनी जानी चाहिए, इसलिए उनकी याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया गया है. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी भवनों के परिसरों में कुत्तों को खाना खिलाने को लेकर पहले जारी किए गए आदेश आगे भी लागू रहेंगे.
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-भारत एक्सप्रेस
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