साकेत कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार अल फलाह यूनिवर्सिटी (Al Falah University) के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्धिकी को 13 दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है इसलिए रिमांड जरूरी है. एक दिसंबर तक ईडी रिमांड पर रहेगा.
फर्जी NACC और UGC मान्यता
सिद्धिकी पर करीब 415 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का मामला दर्ज है. एजेंसी ने दिल्ली पुलिस से अपने हाथ में लेकर जांच शुरू कर दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि छात्रों को आकर्षित करने के लिए फर्जी एनएएसी और यूजीसी मान्यता के दावा किया गया है.
झूठा और मनगढ़ंत FIR
ईडी ने यूनिवर्सिटी द्वारा वसूले गए 415 करोड़ रुपए की फीस को अपराध से अर्जित धन बताया है. ईडी ने यह भी कहा है कि आरोपी सिद्धिकी पूरे वित्तीय संचालन को नियंत्रित करता था. वही बचाव पक्ष की ओर से पेश वकील ने दर्ज सभी एफआईआर को झूठा और मनगढ़ंत बताया है.
माना जा रहा है कि इन कंपनियों का इस्तेमाल फर्जी लेनदेन और हवाला कारोबार में किया गया. अल फलाह ट्रस्ट और उससे जुड़े संस्थानों का भी पूरा ब्यौरा खंगाला जा रहा है. उसकी 9 शेल कंपनियां एक ही पते पर पाई गई, लेकिन उनमें कोई काम नहीं हो रहा था.
करोड़ों रुपए संस्थाओं में स्थानांतरित
सिद्धिकी को यूनिवर्सिटी परिसर में मिले साक्ष्यों की जांच और विश्लेषण के बाद ईडी ने गिरफ्तार किया गया हैं. अल फलाह यूनिवर्सिटी के परिसरों और अल फ़लाह समूह के प्रमुख व्यक्तियों के आवासीय परिसरों सहित 19 स्थानों पर तलाशी ली थी. ईडी के मुताबिक साक्ष्यों से पता चलता है कि ट्रस्ट ने करोड़ों रुपए पारिवारिक स्वामित्व वाली संस्थाओं में स्थानांतरित किए हैं. ईडी तलाशी के दौरान 48 लाख रुपये से अधिक नकद, कई डिजिटल उपकरण और दस्तावेजों को जब्त किया है.
भारत एक्सप्रेस
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