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यूपी SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग को दिए जांच के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में जमा फॉर्म 7 में गड़बड़ी के आरोपों की जांच का निर्देश चुनाव आयोग को दिया है.

Supreme Court Directs Election Commission Investigate UP SIR Voter List Form 7
Edited by Vaibhav Gupta

देश में निष्पक्ष चुनाव और पारदर्शी मतदाता सूची को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण रुख अपनाया है. उत्तर प्रदेश में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाने के लिए जमा किए गए ‘फॉर्म 7’ में धांधली और अनियमितताओं के आरोपों पर शीर्ष अदालत ने कड़ा संज्ञान लिया है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने निर्वाचन आयोग को इन सभी शिकायतों की विस्तृत जांच कर त्वरित कार्रवाई करने और अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है.

यूपी में एक वर्ग विशेष के नाम हटाने के आरोप

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता (बाराबंकी से सांसद तनुज पुनिया) की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को चौंकाने वाली जानकारी दी. उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के एक ही विधानसभा क्षेत्र में एक खास वर्ग के लोगों का नाम वोटर लिस्ट से काटने की मंशा से करीब 32 हजार फर्जी ‘फॉर्म 7’ जमा कराए गए थे. इनमें से कुछ फॉर्म पर तो बूथ लेवल ऑफिसर के फर्जी हस्ताक्षर तक मिले हैं. चुनाव आयोग के वकील डीएस नायडू ने भी कोर्ट के सामने यह बात स्वीकार की कि इतनी बड़ी संख्या में फॉर्म 7 जमा कराए जाने की शिकायतें सामने आई हैं. कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को सभी अनसुलझी गड़बड़ियों की सूची बनाकर आयोग को सौंपने का निर्देश दिया है.

केरल SIR में समयसीमा बढ़ाने की मांग खारिज

दूसरी तरफ, केरल में एसआईआर जांच की समयसीमा बढ़ाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई राहत देने से इनकार कर दिया. हालांकि, कोर्ट ने यह साफ किया कि जिन नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने या संशोधन से जुड़े मामले पेंडिंग हैं, वे चुनाव आयोग के सामने अपनी शिकायत रख सकते हैं.

केरल सरकार ने स्थानीय निकाय चुनावों और मैनपावर की भारी कमी का हवाला देते हुए एसआईआर प्रक्रिया को टालने की मांग की थी. राज्य सरकार का तर्क था कि स्थानीय चुनावों के लिए करीब 1.76 लाख कर्मचारियों और 68 हजार सुरक्षाकर्मियों की जरूरत है, ऐसे में सीमित कर्मचारियों के साथ एसआईआर कराना प्रशासनिक रूप से बेहद कठिन है. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतों का निपटारा आयोग के स्तर पर ही करने के निर्देश दिए हैं.

यह भी पढ़ें: ‘हर अपमान एससी-एसटी एक्ट का अपराध नहीं’, फिरोजाबाद मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हटाईं धाराएं

-भारत एक्सप्रेस



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