Ankit Sharma Murder Case: दिल्ली हाई कोर्ट ने साल 2020 में हुए दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ऑफिसर अंकित शर्मा की मौत के मामले में उम्रकैद की सजा पाए नाजिम और कासिम की ओर से दायर याचिका पर दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. नाजिम और कासिम ने कड़कड़डूमा कोर्ट के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर की है. कोर्ट दो दिसंबर को अगली सुनवाई करेगा.
निचली अदालत का फैसला और सजा
निचली अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि यह मामला जघन्यतम श्रेणी में नहीं आता है, इसलिए मौत की सजा नहीं दी जा सकती है. कोर्ट ने 13 जुलाई को ताहिर हुसैन सहित पांच लोगों को दोषी करार दिया था.
सजा पर बहस के दौरान दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन सहित अन्य को फांसी की सजा देने की मांग की थी. स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने कहा था कि ये लोग बर्बर हैं, ये लोग अपराध के समय कसाई बन गए थे. एसपीपी ने कहा था कि उन्हें जेल में रखा जाना चाहिए और मौत की सजा दी जानी चाहिए. दिल्ली पुलिस ने कहा था कि यह एक ऐसा केस है जहां अपराधी जानवर बन गए थे. अंकित के मरने के बाद भी उसको मारा गया, उसके शरीर पर निकर के अलावा कोई कपड़ा नहीं था, इनका अपराध ऐसा है जिसको माफ नहीं किया जा सकता. इनको मौत की सजा दी जानी चाहिए.
दिल्ली पुलिस ने कहा था कि अंकित शर्मा को बुरी तरह प्रताड़ित किया गया. उनके शरीर पर 51 जख्म थे, 7 जख्म ऐसे थे जिनसे मौत हो सकती थी, और 16 जख्म धारदार हथियार से किए गए थे.
दोषियों के वकीलों की दलीलें
दूसरी ओर, ताहिर हुसैन की ओर से पेश वकील ने फांसी की सजा की मांग का विरोध किया था. उन्होंने कहा था कि हर केस में मौत की सजा देने का प्रावधान नहीं है. 91 गवाहों के बयान कोर्ट ने दर्ज किए, जिसके बाद 11 में से सिर्फ 5 लोगों को कोर्ट ने दोषी करार दिया था.
हुसैन के वकील ने कहा कि पूरे ट्रायल के दौरान आपराधिक षड्यंत्र (आईपीसी की धारा 120B) का कोई भी साक्ष्य कोर्ट में पेश नहीं किया गया. उन्होंने कहा था कि जिन लोगों ने हमला किया, उन्हें बरी कर दिया गया है. पुलिस भी हिंसक भीड़ को कंट्रोल नहीं कर पा रही थी, ऐसे में किसी एक व्यक्ति को हत्या का जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है.
ताहिर हुसैन के वकील ने यह भी कहा था कि ‘रेयर ऑफ द रेयर’ केस में मौत की सजा दी जानी चाहिए. जहां पर अंकित शर्मा की हत्या हुई, वहां पर ताहिर हुसैन मौजूद नहीं था और अंकित की हत्या की साजिश में ताहिर शामिल नहीं था. हुसैन के वकील ने कहा था कि सिर्फ जख्मों के हिसाब से यह तय नहीं किया जा सकता कि दोषी को मौत की सजा दी जाए.
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अदालत द्वारा तय किए गए आरोप
कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, अनस और जावेद को आईपीसी की धारा 302, 188, 153A, 147, 148, 149 और 365 के तहत दोषी करार दिया था. साथ ही, कोर्ट ने इन्हें आईपीसी की धारा 120B और 129 के तहत अपराधों से बरी कर दिया था.
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