अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में PIL दायर कर चुनावी वादों के वित्तीय प्रभाव, मुफ्त की रेवड़ियों पर रोक और घोषणापत्रों के लिए एक निश्चित प्रारूप लागू करने की मांग की है. (PC: भारत एक्सप्रेस)
Supreme Court Order: सुप्रीम कोर्ट ने असम एनआरसी मामले में दायर याचिका पर याचिका पर जवाब देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 2 सप्ताह का समय दे दिया है. जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है.
केंद्र सरकार और राज्य सरकार की ओर से कोई जबाब नहीं
दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिककर्ताओ की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी नोटिस का केंद्र सरकार और राज्य सरकार की तरफ से अभी तक जवाब नहीं दिया गया है. सिब्बल ने कोर्ट से अनुरोध किया कि उन्हें रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया द्वारा दाखिल जवाब पर अपना जवाब दाखिल करने की अनुमति दी जाए. कोर्ट असम जमीयत उलेमा-ए-हिंद, ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन और असम संख्यालघु संग्राम परिषद की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है. वही हितेश देव शर्मा की ओर से पेश वकील मनीष गोस्वामी ने कोर्ट को बताया कि इसको लेकर एक और याचिका दायर की गई है.
दोबारा प्रमाणन या पुनः सत्यापन की मांग की गई
दायर नई याचिका में असम एनआरसी की पूरी प्रक्रिया के दोबारा प्रमाणन या पुनः सत्यापन की मांग की गई है. कोर्ट के सामने असम एनआरसी की अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद उससे जुड़े कई अहम सवाल है. इनमें एनआरसी में शामिल लोगों को पहचान पत्र जारी करने का मुद्दा और पूरी एनआरसी प्रक्रिया के पुनः सत्यापन की मांग प्रमुख है. पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया था कि जिन लोगों को एनसीआर से बाहर रखा गया है., उनके लिए अपील का प्रावधान तो है, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं हो रहा है. इसको लेकर लोग बहुत परेशान है.
बता दें कि अंतिम एनआरसी जो असम के.असली भारतीय नागरिकों को मान्यता देता है, 31 अगस्त 2019 को जारी किया गया था. एनआरसी में शामिल होने के लिए कुल 3.3 करोड़ लोगो ने अर्जी दायर किया था. जिनमे से 19 लाख 6657 लोगों को बाहर कर दिया गया था.
-भारत एक्सप्रेस
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