यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट में 4 सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी से जुड़े मामले में दायर याचिकाओं पर एसआईटी से नई रिपोर्ट तीन सप्ताह में दाखिल करने का निर्देश दिया है. साथ ही कोर्ट ने याचिककर्ताओ को सुझाव देने को कहा है. वही कोर्ट के आदेश के बाद एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौप दिया है. कोर्ट तीन सप्ताह बाद मामले में अगली सुनवाई करेगा.
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच मामले में सुनवाई कर रही है. कोर्ट ने याचिककर्ताओ की उस मांग को ठुकरा दिया है जिसमें एसआईटी द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट देने की मांग की गई थी. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी से दो सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा था.
कोर्ट ने एक फॉरेंसिक ऑडिटर को एसआईटी में शामिल करने का निर्देश दिया था. उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया था कि मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया गया है. इसकी कमान लखनऊ रेंज में आईजी किरण एस. को सौपी गई है.
वेबसाइट पर भुगतान और प्राप्त राशि का ब्योरा देने की मांग
इसके अन्य सदस्य पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) सोमेन वर्मा और अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) गौरव ग्रोवर शामिल है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने कहा था कि लोगों ने 500 या 1000 रुपए दिए हैं. आखिरकार वह पैसा ट्रस्ट तक नहीं पहुचा है, ट्रस्ट को जो भी मिला है, उसे वेबसाइट पर दिखाया जाना चाहिए ताकि लोगों को पता चल सके कि उनका पैसा पहुंच गया है. यह कोई टकराव वाला मामला नही है. कोर्ट ने कहा था एसआईटी को पहले रिपोर्ट देने दीजिए.
सीजेआई ने कहा था पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने कहा था कि हम घटना की गुणवत्तापूर्ण जांच कर रहे है. सीजेआई ने एक याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट द्वारा निगरानी की मांग को खारिज कर दिया था. इसको लेकर निर्मोही अखाड़े, वकील अजय कुमार राय, वकील दिनेश कुमार यादव, हिंदू धर्म परिषद और राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह की ओर से याचिका दायर की गई है.
निर्मोही अखाड़े ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग की है. दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि ट्रस्ट को सार्वजनिक ट्रस्ट घोषित किया जाए. साथ ही वित्तीय लेनदेन का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई है. अखाड़े ने अदालत से अनुरोध किया है कि वर्तमान ट्रस्ट के गठन और उसके कामकाज में पारदर्शिता की कमी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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