भीमा कोरेगांव मामले में कथित आरोपी 85 वर्षीय कवि पी. वरवरा राव को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. कोर्ट ने राव की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने मेडिकल आधार पर दी गई जमानत की शर्तों में ढील देने की मांग की थी. जस्टिस जे. के महेश्वरी और जस्टिस विजय विश्नोई की पीठ ने राव की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर की दलीलें सुनने के बाद याचिका को वापस लेने के साथ ही खारिज कर दिया है. राव ने कोर्ट से आग्रह किया था कि उन्हें ग्रेटर मुंबई क्षेत्र से बाहर जाने के लिए ट्रायल कोर्ट से पूर्व अनुमति लेने की शर्त हटाई जाए.
कोर्ट ने राव की स्वास्थ्य देखभाल का जिम्मा सौंपा
मामले की सुनवाई के दौरान ग्रोवर ने कोर्ट को बताया कि राव पिछले चार साल से जमानत पर हैं, उनकी तबियत लगातार बिगड़ रही है और आज भी चक्कर आने से गिर गए. उन्होंने कहा कि पहले उनकी पत्नी उनकी देखभाल करती थी, लेकिन अब वे हैदराबाद शिफ्ट हो गई हैं. ऐसे में देखभाल करने वाला कोई नहीं है. ग्रोवर ने आर्थिक स्थिति का भी हवाला दिया. राव को पचास हजार रुपये पेंशन मिलती है, जबकि ईलाज में हर महीने 76 हजार रुपये खर्च हो जाता है.
तेलंगाना में उन्हें मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं मिलती हैं, जबकि मुंबई में हर बार खर्च उठाना पड़ता है. इसपर कोर्ट ने कहा कि सरकार उनकी सेहत का ध्यान रखेगी. अन्यथा आप वही ट्रायल कोर्ट जाए, हमें दिलचस्पी नहीं है. याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि केस की कार्यवाही अभी सीआरपीसी की धारा 207 के चरण में है और ट्रायल जल्दी खत्म होने की फिलहाल कोई संभावना नही है.
बता दें कि महाराष्ट्र के पुणे में वर्ष 2017 में एलगार परिषद के आयोजित कार्यक्रम में भड़काऊ भाषण के बाद भीमा कोरेगांव में हिंसा भड़क गई थी. पुलिस ने दावा किया था कि कार्यक्रम के आयोजकों के नक्सलियों से संबंध है. हिंसा के मामले में जनवरी 2018 में एक्टविस्ट गौतम नवलखा के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था. गौतम नवलखा के साथ अरुण फरेरा, वरवरा राव, वर्णन गोन्साल्विज सुधा भारद्वाज को आरोपी बनाया गया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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