बिहार एसआईआर मामले में दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हम नही चाहते कि नागरिकों के अधिकार राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं पर निर्भर हो. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ मामले में सुनवाई कर रही है. कोर्ट ने बिहार की मसौदा मतदाता सूची से हटाए गए 65 लाख लोगों का विवरण 19 अगस्त तक जिला स्तर पर सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है. साथ ही कोर्ट ने नाम हटाए जाने के कारण को भी बताने को कहा है.
कोर्ट ने कहा कि स्थानीय स्तर के अधिकारी के पास सूची होने का मतलब है कि ग्रामीण उस अधिकारी की दया पर निर्भर है. कोर्ट ने समाचार पत्र, रेडियों और चैनलों पर इसको लेकर प्रचार करने को कहा है. कोर्ट 22 अगस्त को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. कोर्ट ने सुनवाई से पहले रिपोर्ट देने को कहा है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह मामले को अंतिम रूप से बंद नही कर रहा है, इसे तार्किक निष्कर्ष पर ले जाएगा. कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि आपने सुना ही होगा कि ड्राफ्ट रोल में मृत या जीवित लोगों को लेकर गंभीर विवाद है.
कोर्ट ने आयोग से पूछा कि आपके पास ऐसे लोगों की पहचान करने का क्या तंत्र है? जिससे परिवार को पता चल सके कि हमारे सदस्य को सूची में मृतक के रूप में शामिल कर दिया गया है. इसपर आयोग के वकील ने कहा कि राजनीतिक दलों के एजेंट जुड़े हुए हैं. वही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह योगेंद्र यादव द्वारा बिहार के दो लोगों को पेश करने पर विचार नही करेगा, जिन्हें आयोग ने कथित तौर पर मृत घोषित कर दिया गया था. कोर्ट ने कहा कि वह केवल रिकॉर्ड में दर्ज बातों पर ही विचार करेगा.
कोर्ट ने कहा कि जिन लोगो को मसौदा में मृत घोषित किया गया है, वो आधार लेकर अधिकारी के पास जाए और आधार देख कर ड्राफ्ट में सुधार करेगा. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हम राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं की उपेक्षा नहीं कर रहे हैं, लेकिन लोगों के लिए यह करना उचित होगा. इसपर आयोग के वकील ने कहा कि ठीक है हम हरेक विधानसभा क्षेत्र के हिसाब से वेबसाइट में यह जानकारी मुहैया करा देंगे.
सुप्रीम कोर्ट ने ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में बड़ी संख्या में लोगों को मृत दिखाए जाने पर चिंता व्यक्त की है. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि की मतदाता सूची में संशोधन या सत्यापन की जानकारी के लिए लोगों को स्थानीय राजनीतिक पार्टी के एजेंटों पर निर्भर नहीं होना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि नागरिकों के संवैधानिक अधिकार स्वतंत्र रूप से सुरक्षित होना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि आधार और EPIC कार्ड जमा करने का विकल्प भी स्पष्ट किया जाए, ताकि जिन लोगों ने अब तक दस्तावेज नहीं दिए हैं, वे दे सकें.
आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कोर्ट को बताया कि 1 अप्रैल 2025 तक कुल 7.89 करोड़ लोगों में से 7.24 करोड़ की जांच पूरी हो चुकी है, और बाकी के लिए घर-घर जाकर सत्यापन किया जा रहा है.
भारत एक्सप्रेस
Pakistan News: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा स्थित कोहाट में शुक्रवार को ओल्ड पुलिस लाइंस के…
महाराष्ट्र के चंद्रपुर स्थित जटपूरा वार्ड के 'चंद्रपुर चा राजा' गणेश मंडल से जुड़ा एक…
Calorie Surplus for Muscle Gain: जीम में पसीना बहाने के बावजूद मसल्स न बनने की…
EC On TMC New Party Row: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस टीएमसी (TMC) के अंदरूनी…
UP BJP Leader Plot Blast: चित्रकूट में भाजपा नेता के खाली प्लॉट में हुए भीषण…
मुंबई यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ लॉ की ओर से 9वें चीफ जस्टिस एम.सी. चागला मेमोरियल…