Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

बिहार एसआईआर मामले में दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई 13 अगस्त को भी जारी रहेगी

सुप्रीम कोर्ट में बिहार एसआईआर मामले की सुनवाई जारी है, जिसमें मतदाता सूची में हुई त्रुटियों और 65 लाख से अधिक लोगों के नाम हटाने के आरोपों पर बहस हो रही है. चुनाव आयोग और याचिकाकर्ताओं के बीच मतदाता पहचान और नागरिकता के प्रमाणों को लेकर विवाद सामने आया है.

Telangana News, Supreme Court, OBC Reservation

बिहार एसआईआर मामले में दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई 13 अगस्त को भी जारी रहेगी. मामले की सुनवाई के दौरान आरजेडी सांसद मनोज झा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि बिहार में वोटर लिस्ट में 12 लोगों को मृत बताया गया है, जबकि वो जीवित है. इसपर चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि इस तरह के एक्सरसाइज में कुछ गलतियों का होना स्वाभाविक है.

उन्होंने कहा कि मसौदा में जो गलतियां हुई है उसे सुधारा जा सकता है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की कोर्ट इस मामले में सुनवाई कर रही है. चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को यह भी बताया कि कानून के तहत मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के नामों की कोई अलग सूची तैयार करने या साझा करने से उनके नाम शामिल न करने के कारणों को प्रकाशित करने की आवश्यकता नही है. आयोग का कहना था कि आधार कार्ड में गलती या अधूरी जानकारी होने की संभावना रहती है. इसलिए इसे अकेले अंतिम प्रमाण नहीं बनाया जा सकता.

मतदाता की नागरिकता साबित करने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की: कपिल सिब्बल

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील सिब्बल ने कोर्ट में मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 का हवाला देते हुए कहा कि मतदाता की नागरिकता साबित करने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है, न कि व्यक्तिगत मतदाता की. सुनवाई के दौरान याचिककर्ताओ की ओर से एसआईआर के तहत बिहार में 65 लाख लोगों को मतदाता सूची से बाहर करने का आरोप लगाया है. सिब्बल ने यह भी कहा कि नए वोटर को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म 6 भरना होता है.
उस फॉर्म में जन्म तारीख के लिए दस्तावेजी सबूत की सूची में आधार कार्ड को दूसरे नंबर पर रखा गया है. मगर वोटर लिस्ट रिवीजन में आयोग आधार को स्वीकार्य नही कर रहा है.

सिब्बल ने यह भी कहा कि आधार को चुनाव आयोग द्वारा स्वीकार नहीं किया जाता है और बिहार में कई लोगों के पास ऐसे सांकेतिक दस्तावेज नहीं है.

इसपर जस्टिस सूर्यकांत ने जवाब देते हुए कहा कि बिहार भारत का हिस्सा है और यदि इसके निवासियों के पास ये दस्तावेज नहीं हैं तो अन्य राज्यों के लोगों के पास भी ये दस्तावेज नही होने की संभावना है. सिब्बल ने कहा कि जन्म प्रमाण पत्र की बात करें तो केवल 3.056 फीसदी के पास है, जबकि पासपोर्ट 2.7 फीसदी के पास और 10 वी का प्रमाण पत्र 14,.71 फीसदी लोगो के पास है. इसपर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यह साबित करने के लिए कुछ तो होना चाहिए कि आप भारत के नागरिक है.

हर नागरिक के पास होना चाहिए प्रमाण पत्र- कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि हर किसी के पास प्रमाण पत्र होता है, सिम कार्ड खरीदने के लिए इसकी जरूरत होती है. ओबीसी, एससी और एसटी प्रमाण पत्र. वही एडीआर की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि आयोग कह रहा है कि जो लोग ड्राफ्ट रोल में नहीं हैं, उन्हें एक नया फॉर्म भरना होगा. फॉर्म 6 में लिखा है कि मुझे केवल नागरिकता की स्व घोषणा देनी है. इसपर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि स्व-घोषणा स्वीकार करना मुश्किल हो सकता है.

वही याचिकाकर्ता की ओर से पेश अन्य वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में संशोधन की पूरी व्यवस्था ही उलट दी है. सिंघवी ने कहा कि संशोधन के आड़ में वे नागरिकता साबित करने के लिए बोझ को उलटने की कवायद कर रहे है. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश योगेंद्र यादव ने कोर्ट में एक महिला को पेश किया, जिसे मृत बताया गया है. लेकिन वह जिंदा है.

याचिकाकर्ता के आरोपों को बताया ‘टीवी ड्रामा’

यादव ने कहा कि एसआईआर से बड़े पैमाने पर नामों की गलत ढंग से हटाने की प्रकिया शुरू हो चुकी है और 65 लाख से कही ज्यादा लोग प्रभावित हुए है. उन्होंने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया तीनों कसौटियों-पूर्णता, सटीकता और समता पर असफल रही है. यादव की इस दलील को आयोग के वकील ने टीवी ड्रामा बताया है.

ये भी पढ़े: 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल वाहनों के मालिकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक: सुप्रीम कोर्ट

भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital