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न्यायिक कार्य में सुधार नहीं तो छुट्टी तय! जानिए क्यों कॉलेजियम ने कलकत्ता HC के जजों को दिया 6 महीने का समय

Supreme Court Collegium: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कलकत्ता हाईकोर्ट के 6 अतिरिक्त जजों के कार्यकाल को 6 महीने के लिए बढ़ा दिया है. कोर्ट ने उनके फैसलों की गुणवत्ता और न्यायिक प्रदर्शन में सुधार के लिए यह समय दिया है.

कलकत्ता हाईकोर्ट के 6 अतिरिक्त जजों को मिला 6 महीने का सेवा विस्तार.

कलकत्ता हाईकोर्ट के 6 अतिरिक्त जजों को मिला 6 महीने का सेवा विस्तार. (PC: भारत एक्सप्रेस)

Edited by Shubhra Rai

Supreme Court Collegium: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कलकत्ता हाईकोर्ट के 6 अतिरिक्त जजों के कार्यकाल को तीसरी बार बढ़ाने का फैसला किया है. हालांकि इस बार इन जजों को एक साल के जगह में छह महीने का ही सेवा विस्तार दिया गया है. कॉलेजियम ने यह फैसला इन जजों के न्यायिक प्रदर्शन और उनके फैसले लिखने की गुणवत्ता से जुड़े फीडबैक पर विचार करने के बाद लिया है. आम तौर पर अतिरिक्त न्यायाधीशों को एक साल का विस्तार मिलता है, लेकिन कॉलेजियम ने उन्हें अपने प्रदर्शन में सुधार करने के लिए सिर्फ 6 महीने का समय दिया है.

छह अतिरिक्त जजों के कार्यकाल को आगे बढ़ाने की मंजूरी

सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस बी. वी नागरत्ना शामिल है. कॉलेजियम ने 18 अगस्त 2026 को हुई बैठक में इन छह अतिरिक्त जजों के कार्यकाल को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी है. इन सभी छह जजों का संबंध पहले अधीनस्थ न्यायपालिका से रहा है वे जिला जज के तौर पर न्यायिक सेवा में काम कर चुके है और जुलाई 2022 में उन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट में अतिरिक्त जज नियुक्त किया गया था. इस फैसले के तहत जस्टिस प्रसेनजित बिस्वास, जस्टिस उदय कुमार, जस्टिस अजय कुमार गुप्ता, जस्टिस सुप्रतिम भट्टाचार्य, जस्टिस पार्थ सारथी चटर्जी और जस्टिस मो. शब्बर रशीदी को 31 अगस्त 2026 से छह महीने का नया कार्यकाल दिया गया है.

कॉलेजियम ने जजों द्वारा दिए गए फैसले की समीक्षा की

अगले 6 महीनों के दौरान इन न्यायधीशों के कामकाज और प्रदर्शन की दोबारा गहन समीक्षा की जाएगी, जिसके आधार पर भविष्य में इन्हें स्थायी करने पर विचार किया जाएगा. इसी दौरान कॉलेजियम ने कलकत्ता हाईकोर्ट के एक अन्य अतिरिक्त न्यायाधीश जस्टिस बिश्वरूप चौधरी को स्बाई न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है. हालांकि कोर्ट ने कॉलेजियम ने इस बार उन्हें हाई कोर्ट का स्थायी जज बनाने की सिफारिश नहीं की. कॉलेजियम को उनके न्यायिक प्रदर्शन और फैसले लिखने की गुणवत्ता को लेकर अपेक्षित स्तर का सकारात्मक फीडबैक नहीं मिला.

कॉलेजियम ने इन जजों द्वारा दिए गए फैसले की समीक्षा भी की है. समीक्षा के दौरान कॉलेजियम ने पाया कि उनके न्यायिक कामकाज में वह सुधार नहीं आया है, जिसकी अपेक्षा की जा रही थी. इसी वजह से फिलहाल स्थायी नियुक्ति का फैसला टाल दिया गया. अगर प्रदर्शन में पर्याप्त सुधार नहीं होता है तो उनकी स्थायी नियुक्ति की संभावना प्रभावित हो सकती है.

क्या है मामला?

जुलाई 2022 में कुल 9 जिला जजों को कलकत्ता हाईकोर्ट में अतिरिक्त जज नियुक्त किया गया था. इन सभी ने 31 अगस्त 2022 को पद की शपथ ली थी. शुरुआत में उन्हें दो साल के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया था. इसके बाद वर्ष 2024 में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इन नौ जजों के प्रदर्शन की समीक्षा की थी. उस समय कलकत्ता हाईकोर्ट की ओर से इन सभी को स्थायी जज बनाने की सिफारिश की गई थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट कॉलिजियम ने विभिन्न जजों से मिले. फीडबैक, इन जजों द्वारा लिखे गए फैसलों की समीक्षा और उपलब्ध अन्य सामग्री पर विचार करने के बाद सभी को स्थायी नियुक्ति देने के बजाए एक साल के लिए अतिरिक्त जज के रूप में कार्यकाल बढ़ाने का फैसला लिया था.

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-भारत एक्सप्रेस 



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