कांग्रेस नेता अलका लांबा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहा है. जंतर मंतर (Jantar Mantar) पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की, आदेश की अवहेलना और सार्वजनिक मार्ग को बाधित करने के मामले में बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय कर दिया है. एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने यह आरोप तय किया है.
प्रदर्शन में पुलिस पर हमले का आरोप
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वीडियो में अलका लांबा को बैरिकेड्स कूदते, पुलिसकर्मियों को धक्का देते और प्रदर्शनकारियों को भी बैरिकेड्स पार करने के लिए संकेत करते हुए देखा जा सकता है. 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले संसद में महिला आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर हमले का आरोप है.
प्रोविजन के तहत आरोप तय
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस कोर्ट की सोची-समझी राय है कि पहली नजर में आरोपी अलका लांबा के खिलाफ बीएनएस की धारा 132/221/223 (a)/ 285 के तहत मामला बनता है. इसलिए ऊपर बताए गए प्रोविजन के तहत आरोपी के खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया जाता है. साथ ही कोर्ट ने उनके द्वारा मामले से बरी किए जाने की मांग वाली अर्जी को खारिज कर दिया है.
प्रदर्शन शांतिपूर्ण और तय क्षेत्र में
अदालत ने पुलिस के वीडियो साक्ष्यों, शिकायतकर्ता और अन्य पुलिसकर्मियों के बयानों का संज्ञान लेते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री प्रथमदृष्टया संदेह पैदा करती है. हालांकि मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से पेश वकील ने दलील देते हुए कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और तय क्षेत्र में ही हुआ. कोई स्वतंत्र गवाह या चोट के सबूत नहीं हैं. वीडियो में भी हमला या सड़क जाम नहीं दिखता. लेकिन कोर्ट ने इन दलीलों को मानने से इनकार करते हुए आरोप तय कर दिए है.
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-भारत एक्सप्रेस
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