सीजेआई सूर्यकांत
सीजेआई सूर्यकांत ने 23 जून 2026 को मॉस्को में रूस के सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष इगोर क्रास्नोव के साथ हुई बैठक में कहा कि भारत और रूस की न्यायिक व्यवस्थाएं भले ही अलग ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से विकसित हुई हो, लेकिन दोनों के सामने चुनौती समान है. तेजी से बदलती दुनिया में न्याय व्यवस्था पर जनता का विश्वास बनाए रखना.
सीजेआई ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक न्यायपालिका की सफलता दो प्रमुख स्तंभों पर निर्भर करती है. न्यायाधीशों और न्यायिक कर्मचारियों का निरंतर प्रशिक्षण और प्रौद्योगिकी का जिम्मेदारी से इस्तेमाल. सीजेआई ने कहा कि तकनीक न्यायिक मूल्यों का विकल्प नहीं है, बल्कि न्याय तक पहुंच को आसान बनाने का माध्यम है.
वर्चुअल सुनवाई और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से न्यायिक प्रक्रिया हुई तेज
सीजेआई सूर्यकांत ने भारत में ई-कोर्ट परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि ई-फाइलिंग, डिजीटल रिकॉर्ड, वर्चुअल सुनवाई और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी सुविधाओं ने न्यायिक व्यवस्था को अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाया है. उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा विकसित एआई आधारित अनुवाद प्रणाली ‘SUVAS’ और ‘सु सहाय’ चैटबॉट जैसी पहलों का भी जिक्र किया, जो नागरिकों और वकीलों को न्यायिक प्रक्रियाओं की जानकारी उपलब्ध कराती है.
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) केवल सहायक भूमिका निभा सकती है. न्यायिक निर्णय लेना, साक्ष्यों का मूल्यांकन करना और विवेक का इस्तेमाल करना केवल न्यायधीशों का काम है. इसी उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका में एआई के इस्तेमाल को लेकर नियम बनाए है.
न्यायिक शिक्षा पर सीजेआई सूर्यकांत का जोर
सीजेआई सूर्यकांत ने न्यायिक शिक्षा और क्षमता निर्माण पर भी जोर दिया, उन्होंने कहा कि भारत में राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी और राज्य न्यायिक अकादमियां न्यायाधीशों को नई तकनीकों, साइबर कानून, डिजिटल साक्ष्य और नेतृत्व कौशल जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दे रही है. उन्होंने कहा कि न्यायिक शिक्षा केवल प्रशिक्षण नही, बल्कि न्यायपालिका की बौद्धिक क्षमता और मजबूती प्रदान करना है.
सीजेआई सूर्यकांत ने अंत मे कहा कि भारत और रूस के बीच न्यायिक सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता है. न्यायिक अकादमियों के बीच आदान-प्रदान, संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम, शोध सहयोग साझा करने से दोनों देशों के न्याय व्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
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भारत एक्सप्रेस
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