नई दिल्ली में ब्रिक्स मंथन का आज दूसरा दिन है. इसमें 10 देशों के चीफ जस्टिस संबोधन किया है. इस दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने ब्रिक्स सदस्य देशों और सहयोगियों को संबोधित किया है. सीजेआई ने स्वस्थ असहमति और विचार विमर्श की संस्कृति महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि समय पर और अनुमानित तरीके से न्याय मिलना जरूरी है.
सीजेआई ने याद दिलाया कि कैसे नालंदा विश्वविद्यालय शिक्षा का सबसे प्रमुख केंद्र हुआ करता था. जहां दुनिया भर के छात्रों और शोधकर्ताओं को बिना किसी भेदभाव या बाधा के प्रवेश मिलता था. सीजेआई ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय की खासियत यह थी कि वह अपने विद्वानों से प्रवेश देने से पहले कभी भी कानून या दर्शन की किसी साझा प्रणाली पर सहमत होने के लिए नहीं कहता था. बल्कि यह असहमति और विचार-विमर्श के लिए एक स्वस्थ और स्वागत पूर्ण माहौल देता था. सीजेआई ने कहा ब्रिक्स को भी एक जीवंत नालंदा विश्वविद्यालय के रूप में जाना जाना चाहिए. इस दौरान ब्राजील के सुप्रीम फेडरल कोर्ट के प्रेसिडेंट ने मल्टीपोलैरिटी और ज्यादा अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अपील की.
बदलती वैश्विक परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय कानून अहम
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा दौर में जब दुनिया मे अस्थिरता और बदलाव का माहौल है, अंतरराष्ट्रीय कानून बहुत अहम है. साथ ही ब्राजील की सुप्रीम फेडरल कोर्ट ने प्रेसिडेंट ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में कानून के शासन को बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया. पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के चीफ जस्टिस ने सदस्य देशों के न्यायिक सहयोग को एक अहम योगदान बताया और ब्रिक्स के सदस्य और सहयोगी देशों के बीच एकजुटता और सहयोग की अपील की. उन्होंने औधोगिक बदलाव के मौजूदा दौर में नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि सामाजिक समानता और न्याय को बढ़ावा देने में न्यायपालिका अहम भूमिका निभाती है.
पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना ने न्यायिक कामकाज में एआई की बढ़ती भूमिका के बारे में भी बात की और सीमा-पार व्यावसायिक विवादों को सुलझाने में न्यायपालिका की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया है. उन्होंने कानूनी प्रणालियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने और एक वैश्विक न्यायिक सभ्यता के निर्माण में योगदान देने की अपील की है.
वही मिस्र की सुप्रीम कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट के चीफ जस्टिस ने एक ऐसी स्वतंत्र और निष्पक्ष कानूनी प्रणाली की बात की, जिसकी आवाज वैश्विक स्तर पर एक हो. इथियोपिया की फेडरल सुप्रीम कोर्ट के प्रेसिडेंट ने विवादों को सुलझाने के वैकल्पिक तरीके पर ध्यान केंद्रित किया और कानून के शासन तथा आर्थिक विकास के बीच आपसी संबंध पर चर्चा की. जबकि इंडोनेशिया की सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने सदस्य देशों के बीच सर्वोत्तम तौर तरीकों के आदान प्रदान और न्यायिक बातचीत के लिए एक स्थायी मंच बनाने की वकालत की.
इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के चीफ जस्टिस ने इस बात पर जोर दिया कि ब्रिक्स आर्थिक और राजनीतिक विकास को आकार दे रहा है. साथ ही उन्होंने मानवाधिकारों, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के बड़े पैमाने पर उल्लंघन, मानवीय संकट और नागरिकों के विस्थापन पर चिंता जताई है. रशियन फेडरेशन की सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा कि सहयोग और बहुध्रुवीय दुनिया सुनिश्चित करने में ब्रिक्स की अहम भूमिका है.
वही दक्षिण अफ्रीका की सुप्रीम कोर्ट ऑफ अपील के प्रेसिडेंट ने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सहयोग की अपील की. उन्होंने कहा कि पर्यावरण से जुड़े शासन में न्यायिक नेतृत्व की भूमिका के बारे में बात की. यूएई की फेडरल सुप्रीम कोर्ट के प्रेसिडेंट ने कहा कि मध्यस्थता और सुलह आधुनिक अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है.
उन्होंने कहा कि हालांकि डिजिटल टेक्नोलॉजी और एआई न्याय पहुचाने की प्रणालियों को बेहतर बना रहे है., लेकिन इससे इस प्रक्रिया से मानवीय पहलू खत्म नहीं होना चाहिए. उन्होंने आने वाले पीढ़ियों के अधिकारों की रक्षा के लिए पर्यावरण कानून को भी जरूरी बताया.
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-भारत एक्सप्रेस
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