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सुप्रीम कोर्ट से आया ऐसा ऐतिहासिक निर्देश, जिसने बदल दी 70 साल पुरानी व्यवस्था; जानें क्या है पूरा माजरा

Supreme Court Order: सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद 70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों और लाइलाज बीमारी से पीड़ित कैदियों के हक में बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने सभी राज्यों को मानवीय आधार पर तीन महीने के भीतर एक ठोस और स्पष्ट रिहाई नीति बनाने का आदेश दिया है, जिसकी पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी.

Supreme Court
Edited by Shubhra Rai

Supreme Court Order: सुप्रीम कोर्ट ने 70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार कैदियों की समय से पहले रिहाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिशा निर्देश जारी किया है. कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बुजुर्ग और बीमार कैदियों के लिए एक व्यापक पॉलिसी बनाने का निर्देश दिया है. कोर्ट 19 जनवरी 2027 को मामले में अगली सुनवाई करेगा. कोर्ट ने कहा सरकारें व्यापक पॉलिसी बनाकर इसे नोटिफाइड करें.

सुनवाई के बाद यह दिशा निर्देश जारी

जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने नालसा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह दिशा निर्देश जारी किया है. कोर्ट ने कहा कि ऐसे सभी मामलों की प्रक्रिया अब e-Prisons पोर्टल के माध्यम से संचालित की जाए. पोर्टल पर आवेदन दाखिल होने को लेकर मेडिकल जांच, जेल अधिकारियों और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट, अंडरट्रायल रिव्यू कमेटी की सिफारिश, सक्षम प्राधिकारी का अंतिम फैसला और उसके कारण तक हर चरण का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा. कोर्ट ने कहा कि ऐसी पॉलिसी संबंधित राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों के साथ सलाह-मशविरा करके बनाई जाएगी. ताकि संस्थागत तालमेल और पात्र कैदियों की सही पहचान सुनिश्चित की जा सकें.

सुप्रीम कोर्ट का सरकारों को सख्त अल्टीमेटम

उस पॉलिसी में रिहाई पर विचार करने के लिए पात्रता के मानदंड और प्रक्रियात्मक ढांचे को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाएगा. कोर्ट द्वारा जारी दिशा निर्देश में कहा गया है कि मानवीय आधार पर 70 साल से ज्यादा उम्र के कैदियों, लाइलाज या गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कैदियों और शारीरिक रूप से अक्षम कैदियों की समय से पहले रिहाई के लिए तीन महीने के भीतर एक पॉलिसी बनाने का निर्देश दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस पॉलिसी में पात्रता के लिए स्पष्ट नियम लाइलाज बीमारी की सटीक परिभाषा और एक स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड द्वारा निष्पक्ष स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था होनी चाहिए. कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि रिहाई के आवेदनों पर बिना किसी देरी के कार्रवाई की जाए. कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह भी आदेश दिया कि वे इस निर्देश के पालन के बारे में 6 महीने के भीतर एक हलफनामा दाखिल करें.

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-भारत एक्सप्रेस



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