झारखंड हाई कोर्ट में आयोजित सिल्वर जुबली समारोह में शामिल सुप्रीम कोर्ट के अगले मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि जैसे आधुनिक अस्पताल अपने इमरजेंसी वार्ड को हर संकट से निपटने के लिए तैयार रखते हैं, वैसे ही हमारे हाई कोर्ट्स को भी तुरंत, सटीक और प्रभावी न्याय प्रदान करने के लिए अपनी संरचना को तैयार करना होगा.
संविधान केवल लिखावट नहीं
इस कार्यक्रम में जस्टिस सूर्यकांत के अलावे, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, विभिन्न हाई कोर्ट्स के मुख्य न्यायाधीश, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में न्यायिक अधिकारी मौजूद थे. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि भारत का संविधान केवल लिखावट नहीं, बल्कि एक जीवंत सामाजिक अनुबंध है, जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों को व्यवहार में उतारने के लिए न्यायपालिका को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देता है.
उन्होंने अपनी पहली सुनवाई के अनुभव को भी साझा किया. उन्होंने कहा कि दो नाबालिग बच्चों से जुड़े एक कस्टडी के मामले ने उन्हें यह समझाया कि न्याय केवल विवाद सुलझाने का माध्यम नहीं है, बल्कि उन मासूमों की रक्षा का संकल्प है जो परिस्थितियों की आंधी में खोने लगते हैं. जस्टिस सूर्यकांत ने अनुच्छेद 226 की चर्चा करते हुए कहा कि हाई कोर्ट न केवल मौलिक अधिकार, बल्कि सभी कानूनी अधिकारों की रक्षा करने की शक्ति प्रदान करता है. यही कारण है कि हाई कोर्ट पूरे न्यायिक ढांचे की धुरी हैं और नागरिकों के सबसे नजदीक रहकर संविधान को जीवन देते हैं.
तकनीकी सुधारों ने न्याय तक पहुंचने में आसानी
उन्होंने झारखंड हाई कोर्ट को लेकर आगे कहा कि न्यायालय ने जनजातीय अधिकारों की रक्षा, श्रमिकों की गरिमा, पर्यावरण संरक्षण और खनिज संसाधनों के न्यायपूर्ण उपयोग पर कई महत्वपूर्ण फैसले दिए है. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि ई-फाइलिंग, रियल-टाइम केस ट्रैकिंग, डिजिटल डेटाबेस और दृष्टिबाधितों के लिए विशेष पोर्टल जैसे तकनीकी सुधारों ने न्याय तक पहुंच को आसान बनाया है.
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के साथ न्यायाधीशों की सक्रिय भूमिका ने जमीनी स्तर पर कानूनी साक्षरता और न्याय सहायता को और मजबूत किया हैं. न्यायिक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक, साइबर अपराध, पर्यावरणीय संकट और जटिल सामाजिक आर्थिक विवादों के लिए न्यायपालिका को नए कौशल और अत्याधुनिक ढांचे की जरूरत है.
जस्टिस सूर्यकांत ने समारोह में शामिल सभी वर्त्तमान और पूर्व मुख्य न्यायधीशों, न्यायधीशों, अधिकारियों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि झारखंड हाई कोर्ट की यह 25 वर्षीय यात्रा न्याय के गीत की एक मजबूत धुन है और यह विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी.
-भारत एक्सप्रेस
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