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दिल्ली शराब नीति: 23 लोगों को बरी करने के खिलाफ CBI की अपील, 6 अप्रैल को होगी हाई कोर्ट में अगली सुनवाई

दिल्ली हाई कोर्ट 6 अप्रैल को शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया सहित 23 लोगों को आरोपमुक्त करने के फैसले के खिलाफ सीबीआई की अपील पर सुनवाई करेगा.

Delhi Liquor Policy Case Arvind Kejriwal Discharge CBI Appealed in High Court
Edited by Vaibhav Gupta

दिल्ली हाई कोर्ट दिल्ली शराब नीति से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में 23 लोगों को आरोपमुक्त किए जाने के खिलाफ दायर सीबीआई की अपील पर 6 अप्रैल को सुनवाई करेगा. सीबीआई की ओर से दायर अपील पर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की कोर्ट सुनवाई कर रही हैं.

मामले में दायर की LLP

मामले की सुनवाई के दौरान केजरीवाल, सिसोदिया सहित अन्य की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की गई है. लिहाजा सुनवाई को टाल दिया जाए.

हालांकि सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध करते हुए सुनवाई टालने की मांग को खारिज करने का अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि सुनवाई को अगर टाल दिया गया तो आगे के लिए पैटर्न बन जाएगा. 9 मार्च को कोर्ट ने सभी 23 लोगों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था.

CBI की अपील को चुनौती

सुनवाई के दौरान केजरीवाल सहित अन्य के वकीलों ने कहा कि हमें कोर्ट ने 598 पेज के आदेश में बरी किया गया है. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ अपील दायर की है, जिसमें सीबीआई द्वारा की गई अपील को चुनौती दी गई है.

उन्होंने अदालत से मांग की है कि उनके खिलाफ सीबीआई की अपील को दिल्ली हाई कोर्ट की मौजूदा बेंच से हटाकर किसी दूसरी बेंच में ट्रांसफर करने की मांग की है.

हाई कोर्ट के समन को SC में चुनौती

इस मामले में पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी अलग याचिका दायर की है. दोनों ने हाई कोर्ट की ओर से जारी समन को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. इससे पहले केजरीवाल की याचिका को खारिज करते हुए मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने स्पष्ट किया था कि सीबीआई की याचिका मौजूदा रोस्टर के अनुसार ही जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच को सौंपी गई है और इसमें किसी तरह के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है.

मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि यदि किसी पक्ष को जज के मामले से अलग होने को लेकर आपत्ति है, तो इस पर निर्णय संबंधित जज ही लेंगी. उन्होंने साफ किया गया प्रशासनिक स्तर पर याचिका को ट्रांसफर करने का कोई ठोस कारण नजर नहीं आता. कोर्ट ने कहा कि रोस्टर प्रणाली के तहत मामलों का आवंटन तय प्रक्रिया के अनुसार होता है, और बिना पर्याप्त आधार के इसमें बदलाव नहीं किया जा सकता.

CBI की चार्जशीट पर कोर्ट की टिप्पणी

निचली अदालत ने 27 फरवरी को अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया सहित 23 आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया था. कोर्ट ने सीबीआई की चार्जशीट पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह न्यायिक जांच में टिक नहीं सकी. इसके बाद सीबीआई ने इस फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर कर दी.

निचली अदालत ने कया था आरोपमुक्त

निचली अदालत ने कहा कि सीबीआई सिसोदिया के खिलाफ आरोप साबित करने में विफल रही है. कोर्ट ने कहा कि केजरीवाल को बिना किसी सबूत को फंसाया गया. कोर्ट ने यह भी कहा कि आबकारी नीति घोटाला में कोई बड़ी साजिश या क्रिमनल इरादा नही था. कोर्ट ने नाराजगी जताई कि अभी तक मुझे कन्फेशनल स्टेटमेंट की कॉपी तक नहीं दी गई. मैं सीबीआई के वकील से ईमानदारी की उम्मीद करता हूं.

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-भारत एक्सप्रेस



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