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दिल्ली हाई कोर्ट 2021 के सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ दायर दिल्ली सरकार की अपील पर 6 अप्रैल को सुनाएगा फैसला

दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस सी. हरि शंकर कर रहे हैं, 6 अप्रैल को दिल्ली सरकार की उस अपील पर फैसला सुनाएगी जो 2021 के सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी.

DELHI HIGH COURT

दिल्ली हाई कोर्ट ने 2021 के सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ दायर दिल्ली सरकार की अपील पर 6 अप्रैल को फैसला सुनाएगा. जस्टिस सी हरि शंकर की अध्यक्षता वाली बेंच ने सभी पक्षों की जिरह के बाद मामले में फैसला सुरक्षित रखा है. इस आदेश में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा 2020 में गरीब किरायेदारों की ओर से किराया देने के किए गए वादों को कानूनी रूप से लागू करने योग्य बना दिया गया था.

सिंगल बेंच ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा प्रेसवार्ता करके किराया भुगतान करने संबंधी वादे को लागू का 27 सितंबर 2021 के आदेश दिया था. सिंगल बेंच ने सितंबर 2022 में किराया देने में असमर्थ गरीबों का किराया भुगतान करने के संबंध में प्रेसवार्ता कर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा की गई घोषणा को दो सप्ताह में लागू करने का आदेश दिया था. सिंगल बेंच ने अपने फैसले में कहा था कि मुख्यमंत्री द्वारा किया गया एक वादा या आश्वासन स्पष्ट रूप से लागू करने योग्य वादे के बराबर है. जिसके कार्यान्वयन पर राज्य द्वारा विचार किया जाना चाहिए. हालांकि राज्य ने अपनी अपील में कहा है कि बयान को गलत तरीके से संदर्भ से बाहर करके देखा गया है और इसकी व्यापक और बिना शर्त वादे या प्रतिनिधित्व के तौर पर गलत व्याख्या की गई है.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया गया बयान बना कानूनी बहस का केंद्र

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि मुख्यमंत्री जब वादा करते हैं तो नागरिक अपेक्षा करते हैं तो इसे पूरा किया जाएगा. सिंगल बेंच ने 89 पेज के अपने फैसले में कहा था कि महामारी और प्रवासी मजदूरों के बड़े पैमाने पर पलायन के कारण घोषित लॉक डाउन की पृष्ठभूमि में जानबूझकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए एक बयान को नजरअंदाज नही किया जा सकता.

बता दें कि कोरोना काल के दौरान अरविंद केजरीवाल ने अपने भाषण में कहा था कि यदि गरीब किराएदार कोरोना महामारी के दौरान किराए का भुगतान करने में असमर्थ था, राज्य इसका भुगतान करेगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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