दिल्ली हाई कोर्ट ने जुआ और सट्टेबाजी को बढ़ावा देने वाली अनियमित मोबाइल ऐप्स पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने यह आदेश दिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दिल्ली सरकार के पास जाकर ज्ञापन देने की छूट दे दिया है. मुख्य न्यायाधीश ने कहा सबसे पहले अधिकारियों के सामने यह ज्ञापन दें कि नए कानून के बावजूद समस्याएं दूर नही होगी, फिर हम देखेंगे.
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि मैं अनियमित सट्टेबाजी और जुए पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहा हूं. ये गूगल और एप्पल स्टोर के माध्यम से संचालित होते है. नया कानून पैसे के खेल से संबंधित है और जनहित याचिका ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए तक ही सीमित है.
केंद्र सरकार का सख्त कानून
बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कानून के तहत सभी ऑनलाइन मनी गेमिंग सेवाओं पर प्रतिबंध लगेगा. नए कानून में मनी गेम का विज्ञापन करने पर दो साल तक कि कैद और 50 लाख रुपए तक का जुर्माना लगेगा. जबकि मनी गेम से संबंधित वित्तीय लेनदेन को बढ़ावा देने पर तीन साल तक कि कैद और एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा. जबकि बार-बार अपराध करने पर तीन से पांच साल की कैद और दो करोड़ रुपए तक जुर्माना लगाया जाएगा.
ई-स्पोर्ट्स और शैक्षणिक खेलों को मिलेगा बढ़ावा
यह बात महत्वपूर्ण है कि विधेयक में प्रमुख धाराओं के तहत अपराधों को संज्ञेय और गैर जमानती बनाने की मांग की गई है. इस विधेयक में ई-स्पोर्ट्स, शैक्षणिक खेल और सामाजिक खेल सहित ऑनलाइन खेल क्षेत्र को बढ़ावा देने, उसे विनियमित करने और इसके विकास तथा विनियमन के लिए एक प्राधिकरण की स्थापना का भी प्रावधान किया गया है. इसके अलावे विधेयक में किसी कंप्यूटर, मोबाइल उपकरण या इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन मनी गेम के प्रस्ताव, संचालन, सरलीकरण, विज्ञापन, प्रचार और भागीदारी को निषिद्ध किया गया है.
उत्तराखंड हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस लोकपाल सिंह की माने तो सरकार द्वारा लाए गए कानून के बाद विदेशी कंपनियां भारत में ऑनलाइन गेमिंग का संचालन नही कर सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह कि चीजों पर लगाम लगनी चाहिए, ताकि समाज और युवा पीढ़ी इसके गिरफ्त में न आ जाए.
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