दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंजनू का टीला स्थित पाकिस्तानी-हिंदू शरणार्थी शिविर को वैकल्पि व्यवस्था होने तक नहीं तोड़ने के दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को निर्देश देने से इनकार कर दिया. जस्टिस धर्मेश शर्मा ने रवि रंजन सिंह की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें और इसी तरह के अन्य शरणार्थियों को इस क्षेत्र में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है.
अदालत ने पिछले साल 13 मार्च को पारित अंतरिम आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें सिंह को अंतरिम राहत दी गई थी और डीडीए को उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने का निर्देश दिया गया था. याचिका में यमुना नदी के किनारे तटबंध बनाने का निर्देश देने की मांग की गई थी जिससे ऐसी कॉलोनियों और धार्मिंक संरचनाओं को संरक्षित किया जा सके और यमुना नदी की पवित्रता भी बनी रहे.
न्यायमूर्ति ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तानी शरणार्थियों को उनकी विदेशी राष्ट्रीयता के कारण डीयूएसआईबी नीति के तहत पुनर्वासित नहीं किया जा सकता है. उन्होंने याचिकाकर्ताओं एवं उसी तरह के अन्य शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता लेने के लिए सीएए, 2019 की धारा 10ए के तहत आवेदन करने की सलाह दी.
साथ ही कहा कि भारतीय नागरिक बन जाने के बाद वे सभी यहां के लोगों की तरह अधिकारों का लाभ ले सकेंगे. इसके लिए वे दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव से संपर्क कर सकते हैं.
ये भी पढ़ें: देश के अंतिम नागरिक तक न्याय पहुंचाना हमारा मौलिक कर्तव्य है: CJI बी.आर. गवई
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.




