The Taj Story: फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ के रिलीज होने का रास्ता साफ हो गया है. दिल्ली हाई कोर्ट ने फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है. दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि हम सुपर सेंसर बोर्ड नहीं है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को संशोधित याचिका के साथ संपर्क करने को कहा है. यह याचिका शकील अब्बास ने दायर की गई थी. दायर जनहित याचिका में कहा गया था कि ताजमहल के मूल स्वरूप के बारे में मनगढ़ंत और भड़काऊ सामग्री प्रस्तुत की गई है.
याचिका में यह भी कहा गया था कि यह फिल्म ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करती है और इससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका है. दायर याचिका में केंद्र सरकार और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे फिल्म को दिए गए प्रमाणपत्र की दोबारा समीक्षा करें.
फिल्म के जरिए एक राजनीतिक दल का प्रचार की कोशिश
अपील में यह भी कहा गया था कि फिल्म में भारत के ऐतिहासिक स्मारक ताजमहल से जुड़ी जानकारी को भ्रामक और गलत तरीके से दिखाया गया है. उन्होंने आरोप लगाया था कि फिल्म एक पक्षपातपूर्ण राजनीतिक विचारधारा को बढ़ावा देती हैं. प्रोडक्शन हाउस, निर्माता, निदेशक, लेखक और अभिनेता परेश रावल लगातार एक-एक करके विवादास्पद फिल्में लॉन्च कर रहे हैं. द कश्मीर फाइल्स और द बंगाल फाइल्स जैसी फिल्मों के जरिए एक खास राजनीतिक दल का प्रचार करने की कोशिश कर रहे हैं.
याचिकाकर्ता के मुताबिक ‘द ताज स्टोरी’ का ट्रेलर 16 अक्टूबर 2025 को जारी किया गया था, जबकि फिल्म की देशभर में रिलीज 31 अक्टूबर को निर्धारित है. इसमें कहा गया था कि तथ्यों के स्पष्ट हेरफेर और उत्तेजक सामग्री के संकेत मिलने के बावजूद सीबीएफसी ने मंजूरी दे दी.
बता दें कि ‘द ताज स्टोरी’ तुषार अमरीश गोयल द्वारा लिखित और निर्देशित और सुरेश झा द्वारा निर्मित एक आगामी हिंदी फिल्म है. इसमें परेश रावल, जाकिर हुसैन, अमृता खानविलकर, नमित दास और स्नेहा वाघ की भूमिकाएं हैं. यह फिल्म ताजमहल के निर्माण के.आसपास के विवादास्पद सवालों की पड़ताल करती है और स्मारक के पारंपरिक ऐतिहासिक कथाओं को चुनौती देती हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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