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दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगा विधायी इतिहास का रिकॉर्ड, पंचायत कानून पर गहराया विवाद

दिल्ली हाईकोर्ट 10 दिसंबर को उस याचिका पर सुनवाई करेगा जिसमें दिल्ली में पंचायत राज अधिनियम 1954 को लागू करने की मांग की गई है. कोर्ट ने सभी पक्षों को दिल्ली के विधायी इतिहास पर नोट जमा करने का निर्देश दिया है.

Delhi High Court

दिल्ली हाईकोर्ट दिल्ली में पंचायत राज अधिनियम 1954 को लागू करने की मांग वाली याचिका पर 10 दिसंबर को सुनवाई करेगा. दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने सभी पक्षकारों को दिल्ली के विधायी इतिहास पर एक नोट रिकॉर्ड में रखने का निर्देश दिया है.

दिल्ली सरकार से कोर्ट का सवाल

नोट में यह बताया जाएगा कि क्या दिल्ली पंचायत राज अधिनियम के प्रावधान अभी भी दिल्ली के क्षेत्रों पर लागू है या उक्त अधिनियम बाद के घटनाक्रमों के कारण निरस्त हो गया है. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली सरकार के स्थायी वकील समीर वशिष्ट से पूछा कि क्या दिल्ली पंचायत राज अधिनियम 1954 अभी भी अस्तित्व में है और क्या यह दिल्ली के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों पर लागू है.

सुप्रीम कोर्ट पहले ही कर चुका है याचिका खारिज

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में महिलाओं के लिए सीटों के आरक्षण का मुद्दा उठाया गया था. मामले की सुनवाई के दौरान वकील ने कहा था कि विधायिका ने 30 साल पहले कानून पारित किया था, लेकिन कार्यपालिका ने इसे लागू करने में विफल रही है. सुप्रीम कोर्ट इस पर विचार करने के लिए समिति का गठन कर सकती है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया था.

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि आप कहते है कि यह प्रॉक्सी द्वारा किया जा रहा है. क्या हम महिलाओं को चुनाव लड़ने से रोक सकते है. कोर्ट ने कहा कि यह एक विकासवादी प्रक्रिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा था कि क्या उन्होंने इस बारे में किसी सरकारी विभाग को कोई प्रतिवेदन दिया गया है.

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