दिल्ली हाई कोर्ट ने रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और अन्य अधिकारियों के खिलाफ प्रमोशन में कथित अनियमितताओं के मामले में लोकपाल द्वारा शुरू की गई कार्यवाही को रद्द कर दिया है. जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैधनाथन शंकर की पीठ ने यह आदेश दिया है.
आरोप सामने आने के बाद दर्ज हुई शिकायत
मामला नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल में 28 मार्च 2023 को हुए प्रमोशनों से जुड़ा है. इससे पहले कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि इस न्यायालय का मानना है कि इस मामले में गहन विचार की जरूरत है. इसके मद्देनजर यह कोर्ट 6 जनवरी 2025 के विवादित आदेश, 7 जनवरी 2025 के नोटिस और 4 मार्च 2025 के आदेश और शिकायत संख्या 162/2024 के तहत प्रतिवादी लोकपाल के समक्ष लंबित कार्यवाही के पर रोक लगाने के इच्छुक है.
बता दें कि यह मामला 28 मार्च 2023 को एनपीसी द्वारा की गई पदोन्नति में अनियमितताओं का आरोप सामने आने के बाद शिकायत दर्ज की गई थी. जिसके बाद लोकपाल ने जनवरी में राजेश कुमार सिंह को नोटिस जारी किया था. जिसके बाद सिंह सहित अन्य ने लोकपाल के नोटिस और कार्यवाही को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी.
मामले में गहन विचार की जरूरत
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि विचाराधीन पद्दोन्नति राजेश कुमार सिंह द्वारा 21 अप्रैल 2023 को उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के सचिव का पद संभालने से पहले हुई थी.
याचिकाकर्ता के वकील ने यह भी कहा था कि लोकपाल की कार्रवाई उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है, क्योंकि लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2013 के अनुसार शिकायतों में भ्र्ष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराधों के आरोप शामिल है. उन्होंने कहा था कि पदोन्नति में अनियमितताओं के आरोप इस दायरे में नहीं आता है. जिसपर कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में गहन विचार की जरूरत है.
लोकपाल के अधिकार क्षेत्र को चुनौती
कोर्ट ने कहा था कि लोकपाल के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी जा रही है. ज्ञात हो कि राजेश कुमार सिंह 1989 केरल कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी है. उन्होंने उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के सचिव और पशुपालन और डेयरी के सचिव सहित कई प्रमुख सरकारी पदों पर कार्यरत थे. एक नवंबर को उन्हें गिरिधर अरमाने की जगह पर 40 वे रक्षा सचिव नियुक्त किया गया.
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-भारत एक्सप्रेस
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