दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के नेता ए एस इस्माइल को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया है. ए एस इस्माइल को युएपीए के तहत गिरफ्तार किया गया है. जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैधनाथन शंकर की पीठ ने कहा कि ए एस इस्माइल के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है, लिहाजा मेडिकल ग्राउंड पर अंतरिम जमानत याचिका खारिज की जाती है.
इस्माइल ने मेडिकल ग्राउंड पर अंतरिम जमानत की मांग की थी. इस मामले में दाखिल पांचवें चार्जशीट राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद के 12 सदस्यों सहित 19 लोगों के खिलाफ दाखिल किया जा चुका है.
यह मामला देश में इस्लामिक खिलाफत की स्थापना के लिए युद्ध छेड़ने की साजिश में कथित संलिप्तता से जुड़ा है. एनआईए के मुताबिक देश भर में पीएफआई मामलों में अब तक 105 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया जा चुका है.
मामले में ये हैं आरोपी
एनआईए ने आईपीसी और यूएपीए अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत पीएफआई सदस्यों के साथ कैडरों के खिलाफ चार्जशीट दायर की और उनकी पहचान ओएमए सलाम, ईएम अब्दुल रहमान, अनीस अहमद, अफसर पाशा, वीपी नजीरुद्दीन, ई अबूबकर, प्रो. पी कोया, मोहम्मद अली जिन्ना, अब्दुल वाहिद सैत, ए एस इस्माइल, एडवोकेट मोहम्मद यूसुफ, मोहम्मद बशीर, शफीर के पी, जसीर के पी, शाहिद नासिर, वसीम अहमद, मोहम्मद शाकिफ़, मोहम्मद फारूक उर रहमान और यासर अराफात उर्फ यासिर हसन के रूप में हुई है.
इससे पहले मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार पीएफआई के तीन नेताओं को जमानत दे दिया था. पीएफआई दिल्ली के अध्यक्ष परवेज अहमद, पीएफआई दिल्ली के महासचिव मोहम्मद इलियास और अब्दुल मुकीट को जमानत दिया था. दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि अपराध की आय कथित आपराधिक गतिविधि के परिणामस्वरूप अर्जित होनी चाहिए. कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध नहीं बनता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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