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जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग मामले में आरोपी और बारामूला से सांसद राशिद इंजीनियर की ओर से दायर याचिका पर फैसला सुरक्षित

दिल्ली हाई कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग मामले में आरोपी और बारामूला से सांसद राशिद इंजीनियर की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा है. सांसद की ओर से दलील दी गई कि संसद में उपस्थित होना उनका अधिकार और कर्तव्य है, जबकि सरकार की शर्तें इस जिम्मेदारी को बाधित करती हैं.

Terror Funding Case

राशिद इंजीनियर

जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग मामले में आरोपी और बारामूला से सांसद राशिद इंजीनियर की ओर से दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की पीठ सभी पक्षों की जिरह के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है.

सांसद की ओर से दी गई दलील

मामले की सुनवाई के दौरान इंजीनियर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरिहरन ने कहा कि जहां तक संसदीय लोकतंत्र का सवाल है, यह संविधान का मूल ढांचा है. वह आधार जिस पर सब कुछ टिका है. हर अधिकार का एक कर्तव्य होता है. संसद के रूप में संसद में उपस्थित होने का अधिकार है. सुरेश कलमाडी मामले में दिए गए फैसले में इसका जिक्र नहीं है कनिन मुझे यह कर्तव्य निभाने का आदेश देता है. मुझे बिना किसी बंधन के प्रचार करने की आजादी दी गई थी.

कोर्ट की आपत्तियाँ

इसपर जस्टिस भंभानी ने कहा कि जब आप कहते हैं और यह उचित नहीं है? क्या आप मात्रा की बात कर रहे हैं? मान लीजिए सांसद केरल में है, तो ये आठ लाख 80 हजार हो जाएंगे. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरिहरन ने कहा कि इस शर्त को खत्म करना होगा, यह कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा डालती है. क्या वे विचाराधीन कैदी पर आरोप लगाते हैं?  जस्टिस चौधरी ने कहा कि क्या सांसद में उपस्थित होना आपका कर्तव्य है? हरिहरन ने कहा कि संसद में उपस्थित होने की शर्त इतनी कठिन है कि यह कर्तव्य को पराजित करती है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि जब हिरासत पैरोल दी जाती है, तो यह आमतौर पर व्यक्ति की लागत पर होती है.

यात्रा खर्च पर विवाद

राशिद इंजीनियर ने संसद सत्र में भाग लेने के लिए यात्रा खर्च का भुगतान करने के निर्देश देने वाले आदेश को चुनौती दी है. याचिकाकर्ता के वकील ने कहा था कि हम इसे अनुचित और अन्यायपूर्ण इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि राशिद एक निर्वाचित सांसद है. हरिहरन ने कहा था कि जब मैंने (राशिद) शपथ ली थी, तब राज्य ने मुझसे कभी खर्च के बारे में नहीं पूछा. ये शर्ते इसलिए लगाई जा रही हैं ताकि मेरे निर्वाचन क्षेत्र की आवाज न सुनी जाए. एक आधिकारिक कर्तव्य है जो हमें सौंपा गया है.

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भारत एक्सप्रेस



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