दिल्ली हाई कोर्ट ने छह साल की एक नाबालिग बच्ची के साथ क्रूरता एवं यौन उत्पीड़न के दोषी दत्तक माता-पिता की दोषसिद्धि को बरकरार रखा है. साथ ही कोर्ट ने संभावना जताई है कि यह बाल तस्करी का मामला भी हो सकता है. इसकी जांच नही करने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई है.
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि जांच अधिकारी ने बच्ची के जैविक माता-पिता का पता लगाने का प्रयास तक नहीं किया और न ही इस बारे में कोई कदम उठाया कि बच्ची दत्तक माता-पिता के पास कैसे पहुची. यह प्रश्न अनुत्तरित रह जाता है कि क्या बच्ची की तस्करी की गई थी या उसे अवैध रूप से अपीलकर्ताओं के पास स्थानांतरित किया गया था. क्योंकिं नाबालिग बच्ची के गोद लेने या तस्करी के पहलू की कोई जांच तक नहीं कि गई.
नाबालिग से क्रूरता पर हाई कोर्ट ने जताई चिंता
उन्होंने यह भी कहा कि एक छोटी बच्ची, जिसे बुरी तरह प्रताड़ित किया गया और क्रूरता की गई, वह दत्तक माता-पिता के साथ रह रही थी. इसके बावजूद न तो दिल्ली पुलिस और न ही निचली अदालत ने नाबालिग की पृष्ठभूमि की जांच करना उचित समझा. जबकि उसे मानव तस्करी या अवैध हिरासत के संदेह के रूप में भी देखना चाहिए था. जबतक ऐसी लापरवाही को दूर नहीं किया जाता, बच्चों की तस्करी और शोषण की बुराई पर प्रभावी ढंग से अंकुश नहीं लगाया जा सकता है.
कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामलों में न केवल क्रूरता व यौन उत्पीड़न की जांच की आवश्यकता होती है, बल्कि बाल तस्करी, अपहरण या गैरकानूनी हिरासत के व्यापक परिदृश्य के प्रति एक समग्र दृष्टिकोण की भी आवश्यकता होती है.
-भारत एक्सप्रेस
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