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दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, दूसरे राज्यों के रिटायर्ड जज नहीं बन सकेंगे वरिष्ठ वकील

दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि दिल्ली से बाहर के रिटायर्ड जज सीनियर एडवोकेट नहीं बन सकते. कोर्ट ने नियम 9B को वैध बताया और याचिका खारिज कर दी.

Delhi High Court

सांकेतिक तस्वीर.

Prashant Rai Edited by Prashant Rai

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि दिल्ली से बाहर के रिटायर्ड जजों को सीनियर एडवोकेट का दर्जा नहीं दिया जा सकता. कोर्ट ने वरिष्ठ वकीलों के लिए नियम 9B को पूरी तरह वैध करार दिया है.

दिल्ली हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने उत्तर प्रदेश के एक रिटायर्ड जज की याचिका को खारिज कर दिया. याचिकाकर्ता ने “दिल्ली हाई कोर्ट ऑफ डेजिग्नेशन ऑफ सीनियर एडवोकेट नियम 2024” के नियम 9B को चुनौती दी थी. यह नियम सिर्फ दिल्ली न्यायिक सेवा (DHJS) से रिटायर हुए जजों को सीनियर एडवोकेट के लिए आवेदन करने की अनुमति देता है.

कोर्ट ने कहा कि वरिष्ठ वकील का दर्जा सिर्फ एक विशेष स्थिति देता है, लेकिन यह किसी भी वकील को सुप्रीम कोर्ट या अन्य अदालतों में प्रैक्टिस करने से नहीं रोकता.

याचिकाकर्ता की दलील क्या थी?

रिटायर्ड जस्टिस विजय प्रताप सिंह ने अपनी याचिका में नियम 9B को भेदभावपूर्ण और संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(g) और 21 का उल्लंघन बताया था. उनका तर्क था कि यह नियम मनमाना है और दिल्ली हाई कोर्ट के बाहर रिटायर हुए जजों के अधिकारों का हनन करता है.

कोर्ट ने कहा कि सीनियर एडवोकेट का दर्जा किसी भी व्यक्ति की न्यायिक प्रतिष्ठा, व्यवहार और कार्यशैली के आधार पर दिया जाता है. सिर्फ रिकॉर्ड के आधार पर इसका मूल्यांकन करना संभव नहीं है.

रूल 9B सिर्फ दिल्ली हाई कोर्ट सेवा (DHJS) से रिटायर जजों पर लागू होता है. दिल्ली से रिटायर जजों की 10 साल की सेवा को 10 साल की प्रैक्टिस के बराबर माना जाता है. लेकिन दूसरे राज्यों से रिटायर हुए जजों को 10 साल की वकालत पूरी करने के बाद नियम 9A के तहत आवेदन करना होगा.

जानकारों की राय

सुप्रीम कोर्ट के वकील एम. एल. लाहोटी ने कोर्ट के फैसले को सही ठहराया. उन्होंने कहा कि हर रिटायर्ड जज को उसी हाई कोर्ट में वरिष्ठ वकील के लिए आवेदन करना चाहिए, जहां से वह सेवानिवृत्त हुआ हो.

उत्तराखंड हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस लोकपाल सिंह ने भी फैसले का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि वरिष्ठ वकील की पदवी मौलिक अधिकार नहीं है. दिल्ली हाई कोर्ट यह नियम इसलिए लागू करता है, क्योंकि दिल्ली से रिटायर जजों का रिकॉर्ड उसके पास मौजूद रहता है. लेकिन दूसरे राज्यों के रिटायर्ड जजों की जानकारी नहीं होती, इसलिए उन्हें यह दर्जा नहीं दिया जाता.


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-भारत एक्सप्रेस



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