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वर्ष 2003 में आठ साल की बच्ची के साथ बलात्कार कर उसकी हत्या के दोषी को दिल्ली हाई कोर्ट से नही मिली राहत

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2003 में आठ साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे दोषी की समय पूर्व रिहाई से इनकार करने के सजा समीक्षा बोर्ड (SRB) के आदेश को रद्द कर दिया है.

वर्ष 2003 में आठ साल की बच्ची के साथ बलात्कार कर उसकी हत्या के दोषी को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका लगा है. कोर्ट ने उम्रकैद करने की सजा पाए अभियुक्त को समय पूर्व रिहाई करने से इनकार करने के सजा समीक्षा बोर्ड (एसआरबी) के आदेश को रद्द कर दिया है. उसने सरकार से कहा कि वह चार महीने के भीतर एसआरबी की बैठक बुलाकर अभियुक्त के मामले पर पुनर्विचार करे.

दोषी की अर्जी पर पुनर्विचार के निर्देश

जस्टिस गिरीश कठपालिया ने कहा कि दोषी का अपराध जघन्य था, लेकिन उसे इसके लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. वह पहले ही 24 साल जेल में बिता चुका है. किसी अपराध की सजा की भी अपनी सीमाएं होनी चाहिए, अन्यथा वह अपने आप में गलत और अनुत्पादक हो जाएगा.

सजा का उद्देश्य अपराधी का सुधार किया जाना होना चाहिए, न कि उसकी अंतहीन, निर्थक कारावास. दोषी ने अपनी समयपूर्व रिहाई की मांग करते हुए अर्जी दी थी जिसे एसआरबी ने ठुकरा दिया था. उसने एसआरबी की पिछले साल अगस्त व सितंबर के आदेश को चुनौती दी थी.

2004 की नीति के तहत पुनर्विचार जरूरी

अदालत ने कहा कि एसआरबी ने पुलिस और समाज कल्याण विभाग की रिपोर्ट पर विचार किया, उस रिपोर्ट को न तो रिकॉर्ड पर रखा गया और न ही विवादित निर्णय में उनका सार प्रस्तुत किया गया. यहां तक कि वर्ष 2004 की नीति में भी कई मानदंड बनाए गए हैं जिनके आधार पर दोषी के मामले का समीक्षा किया जाना चाहिए. लेकिन विवादित निर्णय से यह पता लगाना संभव नहीं है कि उन मानदंडों को लागू किया गया था या नहीं.


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भारत एक्सप्रेस



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