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Delhi School Fees News: दिल्ली सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि निजी स्कूल 1 अप्रैल से नए सत्र के लिए बिना स्वीकृति के नही वसूल सकते मनमानी फीस

दिल्ली सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि निजी स्कूल 1 अप्रैल से नए सत्र के लिए बिना अनुमति और स्वीकृति के मनमानी फीस नहीं वसूल सकते है. सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने स्कूल स्तर की फीस नियमन समितियों (SLFRC) के गठन पर जोर दिया.

Delhi School Fees News: दिल्ली सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया है कि निजी स्कूल 1 अप्रैल से नए सत्र के लिए बिना स्वीकृति के मनमानी फीस नही वसूल सकते है. मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने फीस नियमन समितियों के गठन पर जोर दिया है, जिसे निजी स्कूल संघों ने चुनौती दी है. मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है. कोर्ट ने एसएलएफआरसी गठन की समय सीमा को 24 फरवरी तक के लिए बढ़ा दिया है.

मामले की सुनवाई के दौरान एएसजी एसवी राजू ने स्पष्ट किया गया निजी स्कूल एक अप्रैल से नए शैक्षणिक सत्र के लिए बिना नियमन और स्वीकृति के.फीस नहीं वसूल सकते. सरकार ने अदालत को बताया कि नई.फीस विनियमन व्यवस्था के तहत तय और स्वीकृत फीस के अलावा कोई शुल्क लेना कानूनन प्रतिबंधित होगा.

एएजी राजू ने कहा कि यदि स्कूल स्तर की फीस नियमन समितियों के गठन पर रोक लगाई जाती है तो  इसके गंभीर परिणाम होंगे. उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि इन समितियों के गठन से स्कूलों को कोई नुकसान नही होगा, बल्कि इससे नए सत्र से पहले फीस तय करने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी.

फीस प्रस्तावों की निगरानी होगी सख्त

दायर याचिका में दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस तय करने और रेगुलेशन में पारदर्शिता) अधिनियम 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी. दिल्ली सरकार ने राजधानी में निजी प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस बढोत्तरी को लगाम लगाने के लिए दिल्ली स्कूल एजुकेशन ट्रांसपेरेंसी इन फिक्सेशन एंड रेगुलेशन ऑफ फीस बिल 2025 लाया गया था. 1973 के दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम और नियमों के साथ-साथ लागू होगा. सरकार द्वारा लाए गए यह कानून शिक्षा विभाग अधिनियम व नियमों में निर्धारित सभी प्रक्रियाओं जैसे स्कूलों से फीस प्रस्तावों की जांच, अनुमतियां, रिपोर्टिंग और निगरानी को लागू करना शुरू करेगा.

नए कानून में फीस निर्धारण और संशोधन की प्रक्रिया में अभिभवकों की अनिवार्य भागीदारी, स्कूलों द्वारा वित्तीय विवरण, खर्च, निधि उपयोग और फीस संरचना का अनिवार्य एवं सार्वजनिक खुलासा, स्पष्ट और मजबूत शिकायत नियंत्रण तंत्र, किसी भी अनधिकृत या अवैध फीस में बढ़ोतरी पर तुरंत कार्रवाई, फीस वृद्धि से पहले विस्तृत प्रक्रिया और सरकार की पूर्व स्वीकृति आवश्यक जैसी प्रमुख बातों को इसमें शामिल किया गया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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