दिल्ली दंगों के मामले में यूएपीए के तहत दर्ज मुकदमों का सामना कर रहे उमर खालिद ने कड़कड़डूमा कोर्ट को बताया कि उनके खिलाफ दर्ज मामला खारिज हो जाएगा. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर वाजपेयी मामले में सुनवाई कर रहे है. मामले की सुनवाई के दौरान खालिद की ओर से पेश वकील त्रिदीप पेस ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने ठोस सबूत पेश करने के बजाए उनकी गिरफ्तारी के लगभग एक साल बाद दर्ज किए गए गवाहों के बयानों पर भरोसा किया है.
कोर्ट में हुई बहस
उन्होंने कहा कि यह केस पूरी तरह से पुलिस बयानों पर आधारित है. इसमें ना तो कोई ठोस और ना ही कोई फिजिकल सबूत मौजूद हैं. कोर्ट बड़ी साजिश के मामले में आरोप तय करने को लेकर सुनवाई कर रहा है. कोर्ट 28 और 29 अक्टूबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. खालिद के वकील ने कहा कि आप घटना के 11 महीने बाद किसी को भी पकड़ सकते हैं, उससे कुछ भी कहलवा सकते है और यह मामला 2020 का है.
वही अभियोजन पक्ष का कहना है कि सबूतों की उसे जरूरत नही है. सिर्फ बयानों की जरूरत है. भाषण के अलावा यह बिना किसी भौतिक साक्ष्य का मामला है. खालिद के वकील ने स्पष्ट किया कि चार व्हाट्सएपग्रुपों में खालिद को जोड़ा गया, उनमें से उसने सिर्फ डीपीएसजी ग्रुप में तीन मैसेज भेजे थे.
उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ा मामला
उन्होंने कहा कि हालांकि उसे एमएसजे ग्रुप में जोड़ा गया. लेकिन उसने कोई मैसेज।नहीं भेजा और ना ही कोई संदेश उसे संबोधित किया गया. यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़ा है, जिसमें 53 लोगों की मौत हुई और 700 से अधिक घायल हुए थे. दंगों में मारे गए लोगों में 38 मुस्लिम और 15 हिंदू थे.
ये भी पढ़ें- नेशनल हेराल्ड मामले में राऊज एवेन्यु कोर्ट 29 नवंबर को सुनवाई करेगा
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

