Urdu Conclave 2026

Suntec City scam: ED की बड़ी कार्रवाई, मुख्य प्रवर्तक अजय सहगल गिरफ्तार; छापेमारी के दौरान बालकनी से फेंके थे 21 लाख रुपये

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सनटेक सिटी घोटाला मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए इंडियन कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी के सचिव और सनटेक सिटी के मुख्य प्रवर्तक अजय सहगल को धन शोधन अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया है.

सनटेक सिटी घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए इंडियन कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी के सचिव और सनटेक सिटी के मुख्य प्रवर्तक अजय सहगल को गिरफ्तार कर लिया है. धन शोधन अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया है. यह गिरफ्तारी सनटेक सिटी प्रोटेक्ट के लिए फर्जी सहमति पत्र जमा कर पंजाब सरकार से धोखाधड़ी से सीएलयू हासिल करने के आरोप में की गई है.

ईडी का आरोप है कि किसानों और जमीन मालिकों के फर्जी सहमति पत्र तैयार कर करीब 30.5 एकड़ जमीन का सीएलयू हासिल किया गया. अभी तक के जांच में पता चला है कि 15 जमीन मालिकों के नाम पर नकली हस्ताक्षर और अंगूठे लगाए गए थे. इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर सनटेक सिटी जैसे बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली और बाद में करोड़ों रुपये का कारोबार खड़ा कर दिया गया. ईडी ने इस महीने की शुरुआत में सहगल, आइसीएचबीएस द्वारा विकसित सनटेक सिटी परियोजना से जुड़े परिसरों और कुछ अन्य स्थानों पर छापे मारे थे.

किसानों की शिकायत पर दर्ज हुआ धनशोधन मामला

धनशोधन का यह मामला किसानों की शिकायत पर पंजाब पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है. किसानों ने आरोप लगाया था कि भूमि उपयोग परिवर्तन की मंजूरी हासिल करने के लिए फर्जी तरीके से सहमति दिखाई गई. सीएलयू किसी भी कृषि जमीन को रिहायशी या कमर्शियल इस्तेमाल में बदलने की सरकारी मंजूरी होती है. बिना सीएलयू के कोई भी बिल्डर खेती की जमीन पर कॉलोनी या कॉम्प्लेक्स नहीं बना सकता है. ईडी का कहना है कि फर्जी दस्तवेज़ों के जरिए यह मंजूरी हासिल की गई और फिर बड़े स्तर पर प्लॉटिंग और निर्माण शुरू कर दिया गया.

सनटेक सिटी के अलावा अन्य परियोजनाएं भी जांच के घेरे में

ईडी के मुताबिक यह सिर्फ एक प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं था बल्कि इसी मंजूरी के आधार पर कई और बड़े निर्माण भी किए गए. ईडी ने जांच में यह भी खुलासा किया है कि अजय सहगल ने सिर्फ सनटेक सिटी ही नहीं बल्कि La Canela नाम की रिहायशी मल्टी-स्टोरी प्रोजेक्ट और district 7 नाम का कमर्शियल कॉप्लेक्स भी इसी विवादित सीएलयू के आधार पर विकसित किया. आरोप है कि इन प्रोजेक्ट्स में फ्लैट, दुकानें और यूनिट्स की बिक्री नियमों को ताक पर रख कर शुरू कर दी गई थी.

ईडी जांच में सामने आया है कि इन परियोजनाओं में रेरा पंजीकरण और मंजूरी से पहले की इकाइयों की बिक्री की जा रही थी. छापेमारी के दौरान बालकनी की जाली से 21 लाख रुपए नकद नीचे सड़क पर फेंके गए, जिन्हें बाद में ईडी अधिकारियों ने जब्त कर लिया.

ये भी पढ़ें: अनुच्छेद 370 विवाद और आतंकी साजिश मामला: सुप्रीम कोर्ट ने सुहैल अहमद ठाकोर को दी बड़ी राहत, मंजूर की जमानत

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read