MUDA Scam: सुप्रीम कोर्ट से मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) घोटाले से संबंधी मामले में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को राहत मिल गई है. कोर्ट ने ईडी की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है. जिसमें मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती और राज्य मंत्री बायरथी सुरेश के खिलाफ जांच रद्द किए जाने को चुनौती दी गई थी.
हाई कोर्ट ने जांच को रद्द कर दिया था, जिसके खिलाफ ईडी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. सीजेआई बी आर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने ईडी की ओर से पेश एडिशनल सॉलीसिटर जनरल एसवी राजू की दलीलों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राजू साहब, कृपया हमें मुंह खोलने के लिए मजबूर मत कीजिए, वरना हमें ईडी के बारे में कुछ कठोर टिप्पणियां करनी पड़ेगी.
दुर्भाग्यवश, महाराष्ट्र में हमें इसका अनुभव रहा है. कृपया इस हिंसा को पूरे देश में न फैलाये. राजनीतिक लड़ाइयां जनता के बीच लड़ी जानी चाहिए. कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश में कोई त्रुटि नही है कोर्ट ने कहा कि सिंगल बेंच द्वारा अपनाई गई सोच और दृष्टिकोण में कोई गलती नहीं पाते. इस मामले में विशेष तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए हम याचिका को खारिज कर रहे हैं.
सीजेआई.बी.आर गवई ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि आपका धन्यवाद राजू साहब कि आपने हमें कुछ कठोर टिप्पणियां करने से बचा लिया. मार्च 2025 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने बीएम पार्वती और मंत्री सुरेश के खिलाफ ईडी द्वारा जारी समन को रद्द कर दिया था. जिसके खिलाफ ईडी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
इस मामले में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को प्रथम आरोपी बनाया गया है, जबकि ईडी के मुताबिक उनकी पत्नी पार्वती को दूसरा आरोपी है. ईडी के मुताबिक पार्वती कथित रूप से अपराध से मिले पैसे का.लाभ मिला था. वहीं लोकायुक्त पुलिस और विशेष जांच दल (एसआईटी) पहले से ही इस मामले की जांच कर रहे थे, इसलिए ईडी की अलग से जांच को समानांतर जांच बताया गया था.
जमीन घोटाले में घिरी सिद्धारमैया की पत्नी, आरोपों को बताया निराधार
मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) कर्नाटक की एक राज्य स्तरीय विकास एजेंसी हैं, जिसका गठत मई 1988 में किया गया था. मुडा का काम शहरी विकास को बढ़ावा देना, गुणवत्तापूर्ण शहरी बुनियादी ढांचे को उपलब्ध कराना, किफायती आवास मुहैया कराना, आवास आदि का निर्माण करना है.
कर्नाटक की राजनीति में इस वक्त MUDA जमीन घोटाले से जुड़ा हुआ मामला है. इस भूमि की नाप 3.14 एकड़ है, जो सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती के नाम पर है. बीजेपी का आरोप है कि इस जमीन खरीद मामले में नियमों को ताक पर रखा गया है. कुछ महीने पहले ही राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने जमीन खरीद से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच के लिए आदेश दिए थे.
मुख्यमंत्री ने आरोप को खारिज करते हुए कहा था कि उनकी पत्नी पिछली भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई 50:50 अनुपात योजना के तहत वैकल्पिक भूमिबकी हकदार थीं, क्योंकि MUDA ने उनकी भूमि का अधिग्रहण किए बिना ही उस पर प्लॉट काट दिए थे.
इस योजना के तहत अगर किसी शख्स की एक एकड़ अविकसित भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा तो उसे इसके बदले एक चौथाई एकड़ विकसित भूमि मिलेगी. मैसूर के रहने वाले मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया था कि उनकी पत्नी को वैकल्पिक भूमि पिछली भाजपा सरकार के दौरान दी गई थी, न कि उनके मुख्यमंत्री रहने के दौरान.
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-भारत एक्सप्रेस
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