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नीट-यूजी पेपर लीक मामले में दाखिल चार्जशीट पर 10 अगस्त को आएगा फैसला, लातूर कनेक्शन और टेस्ट पर भी टिकी निगाहें

नीट-यूजी पेपर लीक मामले में राऊज एवेन्यु कोर्ट ने सीबीआई की चार्जशीट पर संज्ञान लेने के फैसले को सुरक्षित रख लिया है.

rouse avenue court

नीट-यूजी पेपर लीक मामले में गठित फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सीबीआई द्वारा नीट पेपर लीक मामले में दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेने को लेकर राऊज एवेन्यु कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट 10 अगस्त को फैसला सुनाएगा. सीबीआई ने 13 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया है. जिन लोगों को आरोपी बनाया है, उनमें यश यादव, मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, प्रहलाद कुलकर्णी, तेजस हर्षद कुमार, डॉ. मनोज शिरूरे, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, मनीषा वाघमारे, मनीषा मंधारे और मनीषा संजय हवलदार शामिल है. ये सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में है.

सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 315 (5), 318 (4), 61(2), 238, 303 (2), भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13 (2) और 13 (1)(ए) और पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अफेयर मिन्स) एक्ट की धारा 10, धारा 3, 4, 5 और 11 के तहत एफआईआर दर्ज किया था. मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा था कि इस मामले में हर मिनट कीमती है और सभी वकीलों के समन्वय की आवश्यकता होगी. कोर्ट दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की ओर से दायर जमानत याचिका पर 18 अगस्त को सुनवाई करेगा.

जमानत याचिका पर सुनवाई हुई स्थगित

मामले की सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से पेश वकील ने सीबीआई द्वारा चार्जशीट का अध्ययन के लिए समय मांगा. जिसके बाद कोर्ट ने जमानत पर सुनवाई को स्थगित कर दिया. इस बीच वकील एपी सिंह ने मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल और विकास बिवाल का लाई डिटेक्टर टेस्ट, ब्रेन मैपिंग और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने को लेकर दाखिल अर्जी पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है.

कोर्ट 10 अगस्त को फैसला सुनाएगा. दरअसल मांगीलाल बिवाल ने अपने बेटे विकास के लिए पेपर का जुगाड़ करने के लिए शुभम खैरनानर से संपर्क किया, सीबीआई जांच में विकास के मोबाइल से लीक पेपर भी मिला था. सीबीआई के मुताबिक मांगीलाल ने ये पेपर यश यादव से 10 लाख रुपए में खरीदा था. पूछताछ में पता चला कि विकास और यश की जान-पहचान राजस्थान के सीकर में कोचिंग के दौरान हुई थी.

हाल ही में सीबीआई ने शिवराज मोटेगांवकर की ओर से दायर जमानत का विरोध करते हुए कई चौकाने वाले खुलासे किया है. सीबीआई ने राऊज एवेन्यु कोर्ट को बताया था कि लातूर स्थित कोचिंग सेंटर संचालक शिवराज मोटेगांवकर ने एनटीए पैनल में शामिल केमिस्ट्री टीचर पीवी कुलकर्णी से पेपर लीक करवाने के लिए 5 लाख रुपए दिए थे.

सीबीआई ने बताया सुनियोजित साजिश का हिस्सा

सीबीआई का दावा था कि यह पूरा मामला सुनियोजित साजिश का हिस्सा था और इसमें कई लोग शामिल थे. इतना ही नहीं लातूर में रेणुकाई केमेस्ट्री क्लासेज चलाने वाले शिवराज मोटेगांवकर ने अपने बेटे को कुलकर्णी की कोचिंग क्लास में दाखिला दिलवाया था, जहां से उन्हें लीक किया गया प्रश्नपत्र मिला. जांच एजेंसी का आरोप है कि मोटेगांवकर को ये सवाल पी. वी. कुलकर्णी से मिले थे. जो नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के उस पैनल का हिस्सा थे जिसने नीट-यूजी 2026 का प्रश्नपत्र तैयार किया था.

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भारत एक्सप्रेस



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