Bharat Express DD Free Dish

लीगल

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने लाल किला कार धमाके के आरोपी डॉक्टर मल्ला की न्यायिक हिरासत बढ़ा दी है. एनआईए की जांच में सामने आया है कि किस तरह आरोपियों ने नूंह में पनाह ली, आई20 कार खरीदी और धमाके के लिए ड्रोन व रॉकेट तकनीक का इस्तेमाल करने की कोशिश की थी.

जेल में बंद Sukesh Chandrashekhar ने 200 करोड़ की ठगी मामले में एक नया मोड़ ला दिया है. उसने शिकायतकर्ता को 217 करोड़ रुपये वापस करने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन बिना अपना गुनाह कबूल किए. इस मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने नोटिस जारी किया है.

दिल्ली में विकास और पर्यावरण के बीच एक बार फिर कानूनी खींचतान शुरू हो गई है. डीडीए ने अरावली रिज क्षेत्र में सड़क निर्माण के लिए वन भूमि डायवर्जन और पेड़ों की कटाई की अनुमति मांगी है.

भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई में राऊज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (MCD) के एक जेई और उसके सहयोगियों को आपराधिक साजिश और रिश्वतखोरी का दोषी पाया है.

फिल्म अभिनेता और राजनेता पवन कल्याण को दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ी कानूनी जीत दी है. अदालत ने सोशल मीडिया और मर्चेडाइज कंपनियों को सख्त आदेश देते हुए उनके व्यक्तित्व अधिकारों के उल्लंघन पर रोक लगा दी है, जिसमें डीपफेक और डिजिटल एडिटिंग भी शामिल हैं.

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल सीधे तौर पर प्रभावित व्यक्ति ही अवैध निर्माण के खिलाफ याचिका दायर कर सकता है. कोर्ट ने अंगद नगर मामले में याचिकाकर्ता के न मिलने पर इसे अवैध वसूली का जरिया बताया और जुर्माना ठोक दिया.

जस्टिस सचिन दत्ता की पीठ ने प्रोफेसर अलका आचार्य की याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि जब परिवार को इलाज के लिए धन की जरूरत हो, तो कोर्ट मूकदर्शक नहीं बना रह सकता. कोर्ट ने पत्नी को पति की चल-अचल संपत्ति के प्रबंधन का अधिकार दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने कमजोर वर्गों को त्वरित न्याय दिलाने के लिए याचिकाओं को चार श्रेणियों में बांटा है. कोर्ट ने वर्ष 2025 में 75,000 से ज्यादा मामलों का निपटारा कर अमेरिका और ब्रिटेन को भी पीछे छोड़ दिया है.

उत्तराखंड के देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा पर हुए नस्लीय हमले और उनकी मौत के बाद दायर जनहित याचिका में संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन की न्यायिक जांच की मांग की गई है.

सुप्रीम कोर्ट और देशभर के हाई कोर्ट्स में जनहित याचिकाओं की बढ़ती संख्या ने न्यायपालिका को भी चिंता में डाल दिया है. जहां एक ओर जनहित याचिकाएं सामाजिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण और मौलिक अधिकारों की रक्षा का सशक्त माध्यम बनी हैं, वहीं दूसरी ओर कई याचिकाएं पब्लिसिटी स्टंट और न्यायिक समय की बर्बादी भी साबित हो रही हैं.