NALSA National Conference: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के सम्मेलन में ‘ईज ऑफ जस्टिस’ को सच्चे सामाजिक न्याय की नींव बताया. उन्होंने जोर देकर कहा कि कानून की भाषा इतनी आसान होनी चाहिए कि आम नागरिक उसे समझ सके, जिससे कानून का बेहतर अनुपालन हो सके और मुकदमेबाजी कम हो.
‘लीगल एड डिलीवरी मैकेनिज्म्स को मजबूत करने’ पर 20वें राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारी सरकार का ध्यान पिछले 11 वर्षों से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ पर रहा है, लेकिन अब ‘ईज ऑफ जस्टिस’ भी उतना ही आवश्यक है.
हमारी सरकार ‘जन विश्वास अधिनियम’ लाई: PM मोदी
उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए सरकार के प्रयासों को साझा किया. उन्होंने बताया कि सरकार ने गरीबों और वंचितों को न्याय दिलाने के लिए लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम (LADS) शुरू किया है, जिसके तहत केवल तीन साल में लगभग 8 लाख आपराधिक मामलों का निपटारा किया गया है. सरकार ने ‘जन विश्वास अधिनियम’ के माध्यम से 3400 से अधिक कानूनी धाराओं को ‘डी-क्रिमिनलाइज़’ किया, 1500 से अधिक पुराने कानूनों को रद्द किया और दशकों पुराने कानूनों को भारतीय न्याय संहिता से बदला है.
पीएम मोदी ने ई-कोर्ट्स परियोजना के लिए बजट 7000 करोड़ रुपये से अधिक किए जाने का भी जिक्र किया. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 80,000 से अधिक फैसलों को 18 भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने की पहल की सराहना की, ताकि न्याय की भाषा वही हो जो न्याय पाने वाले को समझ आए. इस अवसर पर, विवादों को सहमति से सुलझाने की प्राचीन परंपरा को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से कम्युनिटी मीडिएशन ट्रेनिंग मॉड्यूल का भी ई-लॉन्च किया गया.
‘हिरासत प्रक्रिया में तुरंत सुधार की जरूरत’
सम्मेलन में उपस्थित जस्टिस विक्रमनाथ ने देश की जेलों की गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि भारत की जेलों में 70 प्रतिशत कैदी ऐसे हैं, जिन्हें कोर्ट ने अब तक दोषी नहीं ठहराया है, यानी वे विचाराधीन कैदी हैं. उन्होंने कहा कि कई लोग इसलिए जेल में हैं, क्योंकि वे जमानत नहीं ले पाए या उन्हें समय पर सुनवाई नहीं मिली, और कुछ तो अपराध की अधिकतम संभावित सजा से भी ज्यादा समय जेल में काट चुके हैं. उन्होंने लीगल एड और विचाराधीन कैदियों की हिरासत प्रक्रिया में तुरंत सुधार की जरूरत पर जोर दिया.
इससे पहले, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि लीगल एड गतिविधियों के लिए NALSA का बजट 2015-16 के ₹68 करोड़ से बढ़ाकर वर्तमान वित्त वर्ष में ₹400 करोड़ कर दिया गया है. NALSA अब तक लगभग 1.6 करोड़ नागरिकों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान कर चुका है. इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत सहित कई जज मौजूद थे, जिन्होंने ‘सबके लिए न्याय’ सुनिश्चित करने के संकल्प को दोहराया.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


