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बारामूला से सांसद राशिद इंजीनियर की ओर से दायर अंतरिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित

पटियाला हाउस कोर्ट ने राशिद इंजीनियर की अंतरिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखते हुए 24 अप्रैल को आदेश सुनाने की तारीख तय की है.

Engineer Rashid IANS

जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग मामले में आरोपी और बारामूला से सांसद राशिद इंजीनियर की ओर से दायर अंतरिम जमानत याचिका पर पटियाला हाउस कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट 24 अप्रैल को फैसला सुनाएगा. मामले की सुनवाई के दौरान राशिद इंजीनियर की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि उनके पिता अस्पताल में भर्ती है और वेंटिलेटर पर हैं, ऐसे में मानवीय आधार पर उन्हें तत्काल अंतरिम जमानत दी जानी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि राशिद इंजीनियर की गिरफ्तारी राजनीतिक रूप से प्रेरित है और चुनाव के दौरान आमतौर पर अंतरिम जमानत दी जाती है. वहीं एनआईए ने अंतरिम जमानत का विरोध किया है.

एजेंसी ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कहा कि जमानत के बजाए कस्टडी पैरोल दी जा सकती है. जिससे  राशिद इंजीनियर अपने पिता और परिवार के.सदस्यों से मिल सकेंगे. राशिद इंजीनियर ने बीमार पिता से मिलने के लिए एक महीने का समय मांगा है. एनआईए का इंजीयर की ओर से दायर अंतरिम जमानत याचिका का विरोध किया है. एनआईए ने कोर्ट को सुझाव दिया है कि अंतरिम जमानत के बजाय कस्टडी पैरोल दिया जा सकता है. पटियाला हाउस कोर्ट ने वकीलों को निर्देश लेने के लिए कहा है. इंजीनियर राशिद फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है.

राशिद इंजीनियर ने 2024 के लोकसभा चुनाव में बारामूला सीट पर जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला को हराया था. राशिद इंजीनियर शेख अब्दुल रशीद के नाम से भी जाना जाता है. वह 2017 के आतंकवादी वित्तपोषण (आतंकी फंडिंग) मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद से रशीद 2019 से जेल में बंद है.

राशिद इंजीनियर और अन्य पर भी आरोप तय

पटियाला हाउस कोर्ट ने 16 मार्च 2022 को हाफिज सईद, सैयद सलाहुद्दीन, यासीन मलिक, शब्बीर शाह और मसरत आलम, राशिद इंजीनियर, जहूर अहमद वताली, बिट्टा कराटे, आफताब बट्ट उर्फ पीर सैफुल्ला के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था. एनआईए में मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के सहयोग से लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन, जेकेएलएफ, जैश-ए- मोहम्मद जैसे संगठनों ने जम्मू कश्मीर में आम नागरिकों और सुरक्षा बलों पर हमले और हिंसा को अंजाम दिया. 1993 में अलगाववादी गतिविधियों अंजाम देने के लिए ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस की स्थापना की गई.

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-भारत एक्सप्रेस



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